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उसके बड़े-बड़े बूब्स-1


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desi sex stories हैल्लो दोस्तो, में कुमार आज आप लोगों के लिए बिल्कुल नई और 100% रियल स्टोरी लेकर आया हूँ। ये बात उन दिनों की है, जब हम कॉलेज में पढ़ते थे। हमारे गाँव में कॉलेज नहीं था, इसलिए हम शहर में ही रूम लेकर रहते थे और घरवालों के डर से पूरी आज़ादी थी। कहीं कोई रोकने वाला नहीं था और मेरी क्लास की करीब-करीब सभी लड़कियों से दोस्ती थी, लेकिन अनुराधा जिसे हम अनु पुकारते थे, वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी, वो भी गाँव से आई थी और शहर में ही एक गर्ल्स होस्टल में रहती थी। अनु बहुत ही खूबसूरत थी, उसकी हाईट करीब 5 फुट 5 इंच और फिगर साईज 34-26-30 था। वो अक्सर जींस और टी-शर्ट पहनती थी, जिससे उसके पूरे उभार साफ-साफ नजर आते थे और वो किसी को भी मदहोश करने के लिए काफ़ी थे। उसने सभी लड़को को पागल कर रखा था, कई लोग उसके नाम की मुठ मारते होंगे, लेकिन में उनमें से नहीं था। में और अनु बहुत अच्छे दोस्त थे और में कभी भी कोई गलत बात ना अनु के लिए सोचता था और ना ही अनु सोचती थी। हम अक्सर एक साथ घूमते और कॉलेज में अनु हमारे ग्रुप के साथ ही होती थी। उसकी लड़कियों से दोस्ती कम थी, कई बार अनु मेरे रूम में आकर हम लोगों के साथ पढाई भी करती थी। हम दोनों कभी-कभी शहर से बाहर भी घूमने जाते थे।

फिर एक दिन मैंने अनु से कहा कि यहाँ कुछ दूर एक देवी का मंदिर है और पिकनिक स्पॉट है, वहाँ चलते है, तो तब वो तैयार हो गई। फिर में करीब 12 बजे अनु के होस्टल पहुँचा। फिर वो अपने वार्डन से छुट्टी लेकर निकली और कहा कि हम रात तक आ जाएगें। फिर हम मेरी बाइक से निकले और उस दिन अनु ने जींस टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। अब वो मेरे पीछे अपने दोनों तरफ पैर करके बैठी थी, आज भी उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरी पीठ से टकरा रहे थे, लेकिन वो मेरे लिए आम बात थी। अब मेरी बाइक बहुत स्पीड से चल रही थी। अब वो मेरी कमर पकड़कर कसकर पकड़े बैठी थी। फिर हमने बीच रास्ते में खाना खाया और करीब 3 बजे वहाँ पहुँचे। वो मंदिर ऊपर पहाड़ी पर था। फिर हम लोग करीब 1500 सीढियां चढ़कर ऊपर पहुँचे। अब रविवार होने के कारण वहाँ बहुत भीड़ थी। फिर जब हम दर्शन करके नीचे पहुँचे तो तब 7 बज चुके थे। फिर कुछ देर घूमने के बाद हमने खाना खाया और वापसी के लिए निकले। अब 8 बज चुके थे। फिर अनु ने होस्टल में फोन करके बताया कि वो थोड़ा लेट से आएगी। फिर जब हम वापसी के लिए चले तो तब थोड़ी-थोड़ी बारिश होने लगी और फिर तेज हो गई थी। अब हम कुछ देर के लिए रुक गये थे।

फिर हम बारिश कुछ कम होने पर चले तो कुछ दूर पहुँचने पर बारिश फिर से तेज हो गई, लेकिन हम रुके नहीं, क्योंकि रास्ता सुनसान था, वो पूरा जंगली इलाका था। अब अनु को डर भी लग रहा था। अब वो मुझसे बिल्कुल चिपककर बैठी थी। अब उसके बूब्स मेरी पीठ से लगे हुए थे, लेकिन इस समय में सिर्फ़ घर वापस पहुँचने के बारे में सोच रहा था और सोच रहा था कि कहाँ फंस गये? फिर कुछ दूर जाने पर मेरी बाइक पंचर हो गई। अब दूर-दूर तक कोई नहीं दिख रहा था और अनु का डर के मारे बुरा हाल था। तब मैंने कहा कि में हूँ ना, क्यों डर रही हो? फिर हम कुछ दूर तक पैदल चले और बाइक को घसीटते हुए चल रहे थे कि कोई हेल्प मिल जाए, लेकिन ना कोई गाड़ी दिखी और ना कोई आदमी दिखाई दिया। तभी कुछ दूर चलने के बाद कुछ लाईट दिखाई दी तो तब मैंने सोचा कि कोई गाँव है। फिर जब हम वहाँ पहुँचे, तो वहाँ एक छोटा सा गाँव था, लेकिन वो पूरी तरह सुनसान था। फिर हम लोग बाइक को रोड पर छोड़कर गाँव के अंदर गये। अब वहाँ कुछ लोग घर के बाहर बैठे थे।

फिर हमने उनको अपनी परेशानी बताई तो तब वो बोले कि साहब यहाँ तो कोई पंचर बनाने वाला नहीं है, एक है जो कि पास के गाँव से आता है, लेकिन वो भी जा चुका है। तब मैंने पूछा कि अगला गाँव कितनी दूर है? तो तब वो बोले कि बहुत दूर है, बरसात अभी भी हल्की-हल्की गिर रही थी। अब हम दोनों पूरी तरह से भीग गये थे। तभी गाँव वालों ने कहा कि साहब इतनी रात को ऐसे मत जाइए, आगे इलाका बहुत खराब है, जंगली जानवर भी घूमते है और रोड भी ठीक नहीं है। तब मैंने पूछा कि कोई साधन जाने के लिए। तब वो बोले कि कुछ नहीं है और तब मैंने पूछा कि तो रुकने के लिए। तो तब वो बोले कि एक छोटा सा फोरेस्ट का रेस्ट हाउस कुछ दूरी पर है। तब मैंने अनु से पूछा तो तब वो बोली कि में अब आगे नहीं जाउंगी, भले सारी रात क्यों ना जागना पड़े? तो तब मैंने कहा कि चलो फिर रेस्ट हाउस को ही देखते है।

फिर में बाइक को वही लॉक करके गाँव वालों के बताए रास्ते पर गये, वो रेस्ट हाउस नजदीक ही था, वहाँ चौकीदार था। फिर हमने उसको बताया कि क्या हुआ है? तो तब वो बोला कि साहब यहाँ एक ही रूम है। तब मैंने रूम देखा तो वहाँ एक ही सिंगल बेडरूम था, लेकिन पूरी तरह से साफ सुथरा था। फिर मैंने अनु की तरफ देखा। तब वो बोली कि ठीक है, हम आज यही रुकेंगे। तब वो बोला कि ठीक है। फिर मैंने पूछा कि कोई टावल है, तो तब वो बोला कि साहब एक ही होगा। फिर मैंने अनु से कहा कि तुम अंदर चली जाओ और अपने कपड़े सुखा लो, तो वो अंदर चली गई। अब में बाहर ही था। फिर मैंने चौकीदार से पूछा कि कुछ खाने को मिलेगा। तब वो बोला कि साहब कोशिश करता हूँ। फिर मैंने उसे पैसे दिए तो वो चला गया। अब में बाहर अकेला ही था। फिर करीब 10 मिनट के बाद अनु ने दरवाजा खोला। अब उसने बेडशीट को पूरा लपेट रखा था। फिर वो बोली कि तुम भी अपने कपड़े उतार दो। तो तब मैंने कहा कि में क्या पहनूंगा? तो तब वो बोली कि टावल लपेट लेना।

अब अनु ने पंखा चलाकर कपड़े सूखने डाल दिए थे। अब जींस मोटी होने के कारण पूरा पानी टपक रहा था। फिर में बाथरूम में गया, तो वहाँ अनु की ब्रा और पेंटी पूरी तरह से गीले पड़े थे, वो शर्म के कारण उन्हें बाहर नहीं लाई थी। फिर में भी अपने कपड़े उतारकर टावल लपेटकर बाहर आ गया। अब अनु कुछ शर्मा रही थी इसलिए में बाहर चला गया। फिर अनु बोली कि क्या हुआ? तब मैंने कहा कि तुम अच्छा महसूस नहीं कर रही हो? तो तब उसने कहा कि कोई बात नहीं है, तुम अंदर आ जाओ, बाहर ठंड बहुत है। फिर कुछ देर में चौकीदार आ गया। अब वो कुछ मिक्स्चर और दाल के पैकेट लाया था। फिर हमने थोड़ा थोड़ा खाया तो तब चौकीदार बोला कि साहब अब में अपने क्वार्टर में सोने जा रहा हूँ, कुछ चाहिए हो तो मुझे जगा देना और फिर वो चला गया। अब ठंडी हवा के कारण मैंने खिड़की और दरवाजा बंद कर लिया था। अब हम दोनों अकेले ही रूम में थे।

फिर मैंने अनु से कहा कि तुम पलंग पर सो जाओ और में यहाँ नीचे सो जाता हूँ। फिर मैंने कंबल को बिछाया और लाईट बंद करके नाईट लेम्प ऑन करके सोने की कोशिश करने लगा। अब अनु पलंग पर लेट गई थी। अब मुझे नींद नहीं आ रही थी और अब में करवटे बदल रहा था। अब यह सब अनु भी देख रही थी। तभी वो बोली कि तुम्हें जमीन पर नींद नहीं आएगी, में नीचे सो जाती हूँ। तब मैंने कहा कि नहीं। तब अनु ने कहा कि मुझे ठंड लग रही है। फिर मैंने कहा कि कंबल दे देता हूँ। तब वो बोली कि तो तुम कैसे सोओगे? और फिर वो बोली कि तुम भी पलंग पर आ जाओ, हम दोनों कंबल भी ओढ़ लेंगे। अब में डर रहा था। तब वो बोली कि यार कुछ नहीं होता। अब ऐसा करना ही था, वो पलंग कुछ बड़ा था इसलिए प्रोब्लम नहीं थी। अब में भी पलंग पर था और अब हम दोनों ने एक ही कंबल ओढ़ रखा था। अब मेरे बदन पर टावल के सिवाए कुछ नहीं था और अनु बेडशीट में थी। अब हम दोनों सोने की कोशिश करने लगे थे।

फिर कुछ देर के बाद अनु बोली कि कुमार मुझे नींद नहीं आ रही है। हम लोग बातें करके टाईम पास करते है। तब मैंने कहा कि सो जाओ, लेकिन वो नहीं मानी। अब में पीठ के बल लेट गया था और वो साईड से मेरी तरफ अपना मुँह करके हम बातें करने लगे थे। अब मेरा टावल खुल चुका था। अब उसके पैर कभी-कभी मेरे पैर से टकरा जाते, तब में और उधर कर लेता था। अब में भी साईड बदलकर उसकी तरफ हो गया था। अब मेरा टावल पूरी तरह से खुल चुका था। तभी अचानक से मेरा पैर उसके पैर पर लगा। अब उसकी भी टाँगे नंगी थी। अब बेडशीट अस्त व्यस्त हो गई थी। फिर मैंने अपने आपको संभाला, लेकिन उसका स्पर्श पाकर मेरे बदन में करंट दौड़ गया था। अब में पीठ के बल लेट गया था। तो तब वो बोली कि क्या हो गया? बार-बार साईड बदल रहे हो। तो तब मैंने कहा कि कुछ नहीं, अब में अच्छा महसूस नहीं कर रहा था। तभी अचानक से अनु बोली कि इतने डर क्यों रहे हो? तो तब में बोला कि सो जाओ यही अच्छा है।

फिर तब वो बोली कि नींद नहीं आ रही है और फिर वो बोली कि मेरी तरफ मुँह करके सो जाओ। तब मैंने फिर से साईड चेंज की। अब हम इतने नज़दीक थे कि हमारी साँसे टकरा रही थी, उसकी गर्म साँसे मुझे मदहोश कर रही थी। अब उसकी फिलिंग मेरे लंड तक पहुँच रही थी और अब धीरे-धीरे उसमें भी तनाव आ रहा था। तब अनु बोली कि तुम्हारा मन कहीं और है, बातें कर नहीं रहे हो बस हाँ नहीं में जवाब दे रहे हो। अब मेरी पोज़िशन और खराब होती जा रही थी, क्योंक़ि अनु के पिंक-पिंक लिप्स मेरी आँखो के सामने थे और ठंड के कारण थरथरा रहे थे। फिर मुझे पता नहीं क्या हुआ? मैंने अपने होंठ अनु के होंठो पर लगा दिए। तब अनु हड़बड़ा गई और वो बोली कि क्या हुआ? तो तब मैंने कहा कि कुछ नहीं यार, आई एम सॉरी। अब में अनु से नजर नहीं मिला पा रहा था और उसकी तरफ पीठ करके सो गया था। फिर अनु को ना जाने क्या हुआ? वो मुझसे लिपट गई।

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