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प्यासी आंटी की गदराई गांड


हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी सेक्सी कहानियों को पढ़कर मज़े लेने वालों के लिए मेरी एक सच्ची घटना के बारे में पूरी तरह विस्तार से बताने जा रहा हूँ जो करीब दो साल पहले मेरे साथ घटित हुई और जिसका मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं था कि में कभी अपनी उम्र से भी ज्यादा उम्र की आंटी को चोदकर उसकी प्यास को बुझाकर उनके मन में मेरे लिए इतना प्यार भर दूंगा कि वो मुझे हमेशा याद करेगी.

वैसे तो दोस्तों मुझे पहले दिन से ही अपनी उस आंटी को देखकर कुछ अजीब सा महसूस हुआ था, लेकिन मैंने उस तरफ इतना ध्यान नहीं दिया और मुझे क्या पता था कि धीरे धीरे उनकी वो हरकते एक दिन हमारी चुदाई के खेल पर जाकर खत्म होगी और अब ज्यादा देर बोर ना करते हुए में सीधे अपनी आज की कहानी पर आता हूँ में उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालो को जरुर इसको पढ़कर मज़ा आएगा क्योंकि इसमे बहुत मज़ा है.

दोस्तों में सूरत का रहने वाला हूँ और मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 24 साल मेरी लम्बाई 5.8 और में दिखने में एकदम मस्त लगता हूँ इसलिए मुझे देखकर हर एक लड़की मुझसे दोस्ती करना पसंद करती है.

दोस्तों आज से करीब दो साल पहले में अपनी पढ़ाई को पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा रहा और जाकर मुझे बड़ी मुश्किल से एक नौकरी मिल गई और फिर में एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग का काम करने लगा था और उस काम की वजह से मुझे अक्सर बाहर जाने का काम पढ़ता था में एक महीने में कुछ दिनों तक लगातार ही बाहर रहने लगा था. मेरे बाहर रहने की वजह से अब मेरा मन भी लगने लगा और वो काम मुझे पसंद आने लगा.

फिर एक दिन में अपनी उसी कंपनी के काम से मुंबई चला गया, लेकिन इस बार मुझे कुछ ज्यादा ही दिन वहीं पर रुकना था. वहां पर मुझे पूरे दो महीने का काम था और उस वजह से में मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त से अपनी इस समस्या के बारे में बात करके में उसी के किसी दूर के रिश्तेदार के घर पर ही दो महीने का मेहमान बनकर रहने लगा था, जिसमे बहुत शांति और बस हम तीन लोग ही रहते थे. दोस्तों उस घर में एक अंकल थे.

उनका नाम मिस्टर रंजीत और उनकी उम्र करीब 48 साल थी. एक उनकी पत्नी पिंकी जो उम्र में करीब 42 साल की थी और उनकी एक लड़की भी थी जिसका नाम रूपा था जो कि उस समय अपने कॉलेज की पढ़ाई में लगी हुई थी.

दोस्तों अंकल आंटी की वो लड़की रूपा पुणे के किसी कॉलेज के हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही थी और वो हमेशा ही अपनी छुट्टियों के दिनों में अपने घर पर आती थी इसलिए उस पूरे घर में अंकल और आंटी के अलावा कोई भी नहीं रहता था और कभी कभी अंकल अपने अड़ोस पड़ोस के दोस्तों के साथ गप्पे मारने उनके पास जरुर चले जाते और ज्यादातर समय घर के छोटे काम जैसे बाजार से सब्जी या और भी कुछ सामान लेने भी अंकल ही चले जाते, लेकिन कभी आंटी की इच्छा होती या अंकल की तबियत खराब होती तब आंटी बाजार जाती वरना वो हमेशा घर में ही रहती थी और जब से में उनके घर रहने लगा तो थोड़े बहुत बाहर के काम में भी उनके कहने पर अब कर दिया करता था.

जब में वहां पर पहुंचा तो उस दिन भी घर पर सिर्फ़ अंकल और आंटी ही थी उन्होंने मुझे मेरे रहने के लिए अपना एक रूम दे दिया था जिसमे मेरा सभी जरूरी सामान कपड़े पड़े रहते थे और एक टॉयलेट भी था.

दोस्तों पहले तो में शुरू के दिनों में उनसे बहुत शरमाता था, लेकिन फिर धीरे धीरे हमारे बीच हर कभी बातें होने लगी थी, जिसकी वजह से में उन लोगों में एकदम गुलमिल गया इसलिए मुझे उनके साथ रहते हुए घर जैसा अपनापन लगने लगा था, शायद उनको भी ऐसा ही लगने लगा था और वो आंटी हमेशा ही बहुत अच्छा खाना बनाती थी जिसको खाकर मुझे बिल्कुल घर के जैसा मज़ा आता था और वैसे उन अंकल का भी स्वभाव भी बहुत अच्छा था और वो मुझसे हर कभी बातें हंसी मजाक कर लिया करते थे मतलब की पूरी तरह से वो लोग मुझे अब अच्छे लगने लगे थे और में बड़े आराम से उनके साथ रहने लगा था.

मुझे वहां पर रहकर किसी भी बात की कोई कमी कभी महसूस नहीं हुई. दोस्तों में हर दिन सुबह करीब दस बजे अपने ऑफिस के लिए घर से निकल जाता था और उसके बाद में शाम को सात बजे तक वापस घर आ जाता था और फिर उसके बाद हम सभी लोग एक साथ में बैठकर खाना खाते थे.

फिर उसके बाद में कुछ देर उनके साथ बैठकर बातें करने के बाद अपने कमरे में सोने चला जाता था और हर दिन मेरा उन लोगों के साथ बस यही समय बातें करने या घर पर रुकने का रहता था, क्योंकि में छुट्टियाँ भी कभी नहीं करता और लगातार अपने ऑफिस जाता था, लेकिन दोस्तों मुझे बस एक ही बात कभी कभी बड़ी ख़टकती थी कि वो आंटी मुझे कभी कभी अपनी कुछ ऐसी नज़ारो से देखती थी कि उनके बस देखने से ही मेरे तनबदन में जैसे आग लग जाती थी और वैसे मेरी उस आंटी के बदन को देखकर कोई भी नहीं बोल सकता था कि वो उम्र से 42 साल की है और वो भी एक लड़की की माँ है. बूब्स से वो थोड़ी सी मोटी थी, लेकिन फिर भी मेरी उस आंटी के बूब्स एकदम टाइट थे.

दोस्तों मुझे पहले बड़ी शरम आती थी इसलिए वो जैसे ही मेरी तरफ देखना चालू करती तो में अपना मुहं नीचे कर देता क्योंकि वो उम्र में मुझसे बड़ी थी और कभी कभी तो वो अंकल के सामने भी बस मुझे ही घूरकर देखा करती थी जिसकी वजह से में डर भी जाता था और वैसे वो मुझसे बातें बड़ी प्यारी प्यारी किया करती थी वो दोनों ही बड़े प्यार से मुझे अपने साथ रखते थे और मुझे वहां पर कोई भी किसी भी तरह की पाबंदी नहीं थी, कभी भी रसोई में चले जाओ मर्जी पड़े कुछ भी खाओ मुझे रोकने वाला वहां पर कोई भी नहीं था और व्यहवार में वो दोनों ही पति पत्नी बड़े हंसमुख स्वभाव के थे इसलिए मेरा उनके साथ मन अब लग गया था.

एक दिन शाम को में अपने ऑफिस से घर आया तो मैंने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया और आंटी ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए दरवाजा खोल दिया और फिर में अंदर आकर फ्रेश होकर सोफे पर बैठ गया, उस समय अंकल घर पर नहीं थे.

मैंने इधर उधर नजर घुमाकर अंकल को देखने के बाद आंटी से पूछा कि अंकल कहाँ गए? तब वो मुस्कुराकर मुझसे बोली कि आज वो अपने एक बहुत ही पक्के दोस्त के बेटे को देखने हॉस्पिटल गए है, उसकी तबियत कुछ ज्यादा खराब है और आज वो रात भर वहीं पर रुकने भी वाले है और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि में वहां पर जाकर अंकल को उनका पहले खाना देकर आ जाऊं. तो में जल्दी से तैयार होकर आंटी से हॉस्पिटल का पता पूछकर वहां पर खाना लेकर पहुंच गया. मैंने देखा तो वहां पर बहुत ही ज्यादा भीड़ थी और उसके बाद मैंने अंकल को खाना दे दिया और फिर थोड़ी देर में वहां पर रुक गया तब तक उन्होंने खाना खा लिया और उसके बाद में वो खाली टिफिन भी अपने साथ लेकर वापस घर आ गया.

अब मुझे बड़ी तेज़ भूख लग रही थी इसलिए घर जाते ही सबसे पहले मैंने और आंटी ने साथ में बैठकर खाना खाया और उसके बाद में टीवी देखने लगा था और आंटी अपना रसोई का बचा हुआ काम करने लगी, लेकिन तब मैंने देखा कि वो काम करते हुए बार बार मेरी तरफ अपनी बड़ी प्यासी नजरो से देख रही थी, जिसकी वजह से में एकदम डर गया था. तभी अचानक से वो भी मेरे पास आकर टीवी को देखने बैठ गई, लेकिन में कुछ भी नहीं बोला आंटी ने उस समय सलवार पहनी हुई थी, लेकिन दुपट्टा नहीं पहना था, जिसकी वजह से मुझे उनके गोरे उभरे हुए बूब्स का सेक्सी द्रश्य बड़े आराम से साफ साफ नजर आ रहा था.

फिर में कुछ देर अपनी नजर को टीवी से हटाकर बूब्स पर ले जाता और उन्होंने मुझे ऐसा करते हुए एक दो बार देख लिया, लेकिन वो बस मेरी तरफ देखकर बस थोड़ा सा मुस्कुरा देती उसके अलावा कुछ नहीं कहती. उनकी यह हरकते देखकर मेरी हिम्मत धीरे धीरे बढ़ने लगी थी. फिर थोड़ी ही देर के बाद वो मुझसे पूछने लगी कि बेटा क्या तुम दूध पियोगे?

मैंने भी तुरंत कहा कि हाँ आंटी जरुर तो वो मेरे मुहं से मेरा जवाब सुनकर मेरी तरफ देखकर हंसती हुई उठकर किचन में चली गई. दोस्तों अब तो मुझसे बिल्कुल भी नहीं रहा गया और में उनका वो इशारा समझकर उसी समय उनके पीछे पीछे किचन में चला गया. वो उस समय मेरे लिए दूध गरम कर रही थी और मुझे किचन में देखकर वो मुस्कुराने लगी और अपनी जीभ को अपने होंठो पर घुमाने लगी. में भी हिम्मत करके अब उसके पास चला गया और धीरे से मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गोल गोल गांड पर रख दिए और फिर आंतो को ज़ोर से मेरी तरफ खींच लिया, जिसकी वजह से वो थोड़ा सा शरमाकर मुझसे बोली कि बेटा यह तुम क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि में कुछ नहीं बस ऐसे ही देख रहा हूँ.

फिर उसी समय आंटी ने एक धक्का देकर मुझे अपने से अलग किया और अब वो मुझसे बोली कि बेटा थोड़ी सी तो तुम शरम करो, में तुम्हारे से बड़ी उम्र की हूँ. अब मैंने भी उनसे कहा कि तो मेरी तरफ हर दिन ऐसे लगातार देखते हंसते हुए क्या आपको शरम नहीं आती? फिर वो अब कुछ भी नहीं बोली और फिर में धीरे से उसके पास गया और अब में उनको ज़ोर से पकड़कर चूमने लगा, जिसकी वजह से वो धीरे धीरे मेरी बाहों में पिघलने लगी थी.

मैंने सही मौका देखकर अब आंटी के कपड़े उतारने शुरू किए, पहले वो कुछ देर तक ना ना ही करती रही, लेकिन जब मेरे चूमने सहलाने की वजह से वो गरम होने लगी तो वो भी अपने आप ही अपने कपड़े उतारने लगी थी. अब मैंने उनसे कहा कि जब आपको चुदवाना है तो यह बेकार के नखरे आप क्यों मुझे दिखा रही हो? उसी समय वो मुझसे कहने लगी कि आज से पहले में तुम्हारे अंकल के अलावा किसी और से नहीं चुदी.

मैंने उससे कहा कि हाँ वो सब तो ठीक है, लेकिन जब एक बार आप मेरा लंड लेकर चुदाई करवाओगी तो दोबारा किसी और से चुदाई के लिए नहीं कहोगी. फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर तुरंत ही उसने अपने दोनों हाथों से मेरी पेंट को उतारना शुरू कर दिया और जैसे ही पहली बार उन्होंने मेरा लंबा सा मोटा लंड देखा तो वो उसको देखकर एकदम पागल ही हो गई.

वो अपने दोनों हाथों से लंड को अपनी मुठ्ठी में लेकर उसको चूमने लगी और वो बोली कि बहुत बरसो से मुझे ऐसे लंड का इंतज़ार था और इतना कहकर फिर से लंड को अपने मुहं में लेकर वो पागलों की तरह चूसने लगी, जिसकी वजह से मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था, क्योंकि तब में खुश होकर सातवें आसमान पर जा पहुंचा और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और वो लगातार मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसती ही रही.

कुछ देर बाद मैंने धीरे से आंटी को पकड़कर सोफे पर लेटा दिया और उसके बाद में अपनी दो उँगलियों को उसकी चूत के अंदर डालकर हिलाने लगा. अपने हाथ को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. मेरे ऐसा करने से वो तो मानो पागलों की तरह हवा में उछल कूद करने लगी कि मानो जैसे वो कोई छोटी सी बच्ची हो और वो बार बार अपनी गांड को ऊपर उठा रही थी, जिसकी वजह से हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था और अब वो इतनी जोश में आ चुकी थी इसलिए एक पल के लिए भी नहीं रह सकती थी और उसने ज़ोर से चिल्लाकर मुझसे कहा अभी प्लीज अब डाल दे मेरी चूत में आईईई यह तेरा लंड और आज तू फाड़ डाल मेरी इस चूत को.

फिर उनके मुहं से यह शब्द सुनकर में भी जोश में आकर अब बिल्कुल पागल हो गया और फिर मैंने अपना लंड आंटी की गीली कामुक चूत के मुहं पर रख दिया और अपनी कमर को हिलाना शुरू किया, वो तो मानो जैसे स्वर्ग के मज़े ले रही थी वो लगातार बार बार अपनी गांड को ऊपर उछल उछलकर मेरा लंड अपनी चूत के अंदर डलवा रही थी और वो मुझसे बोल भी रही थी चोदो मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदो आज तुम फाड़ डालो मेरी इस चूत को मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आज तुम जी भरकर चोदो मुझे आज तुम सारी रात चोदो मुझे मस्त मजेदार चुदाई के मज़े दो तुम मुझे आज इतना चोदो कि मेरी आत्मा भी इस चुदाई की वजह से त्रप्त हो जाए. फिर में उनके मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से झटके मारते हुए चुदाई के मज़े लेने लगा और कुछ देर के बाद वो धीरे धीरे शांत होती चली गई. तब मैंने उनसे पूछा कि क्यों क्या हुआ? तो वो बोली कि अब बस करो में बहुत थक गई हूँ, तब मैंने उनसे कहा कि क्या आप इतने में ही थक गई अभी थोड़ी देर पहले तो आप मुझसे आज सारी रात चुदवाने की बात कर रही थी? अब वो कहने लगी कि वो तो में बस ऐसे ही जोश में कह रही थी. फिर मैंने उनसे कहा कि में तो अभी भी जोश में ही हूँ चल आज में तेरी गांड भी मार लेता हूँ यह दिखने में बड़ी अच्छी लगती है शायद मज़ा भी वैसा ही देगी? तो वो बोली कि नहीं बेटे मुझे वहां पर बहुत दर्द होगा, मैंने अब तक वहां कुछ भी ऐसा नहीं करवाया.

अब मैंने उससे कहा कि एक बार गांड मरवाएगी तो दर्द सब भूल जाएगी उसके बाद बड़ा ही मस्त मज़ा भी आएगा और इतना कहते हुए मैंने उसको ज़ोर से कसकर पकड़ते हुए उल्टा लेटा दिया और उसकी गांड में जबरदस्ती अपने लंड को डालकर में धक्के मारने लगा. दोस्तों सबसे पहले वो दर्द की वजह से बड़ी ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी, लेकिन फिर कुछ देर बाद उसको भी मेरे धक्को से मज़ा आने लगा इसलिए अब वो भी अपनी गांड को ऊपर उठाकर बड़े मज़े से मरवा रही थी. फिर मैंने उससे कहा कि देखा अब कितना मस्त मज़ा आ रहा है?

तब वो बोली कि हाँ बेटे तेरे अंकल ने आज तक मेरी गांड नहीं मारी तू आज पहला ऐसा है जिसको मेरी यह गांड नसीब हुई है और मेरी गांड को तेरा यह लंड मिला है. तो आंटी के मुहं से यह बात सुनकर मेरा लंड मानो हथोड़ा बन गया और वो बड़ी तेज गती से आंटी की गांड के अंदर बाहर होने लगा था और थोड़ी ही देर के बाद मेरे लंड का वो रस आंटी की गांड में ही निकल गया और आंटी की पूरी गांड मेरे वीर्य से भर गई और में थोड़ी देर शांत रहकर उसकी गांड पर ही लेट गया.

उस रात हम ऐसे ही पूरे नंगे एक दूसरे से चिपककर सो गये और सुबह जब हम दोनों जागे तब हम दोनों ने साथ में उठकर बाथरूम में जाकर नहाने का मज़ा लिया मैंने बाथरूम में भी एक बार फिर से आंटी को चोदा.

वो अब मेरी चुदाई की वजह से पूरी तरह से त्रप्त हो चुकी है और पूरे दो महीनो तक मैंने बहुत बार अपनी उस प्यासी आंटी को चोदा जब जब अंकल बाजार जाते या वो अपने किसी काम से बाहर जाते तो वो पूरी नंगी होकर मेरे पास आ जाती और उसके बाद हमारी चुदाई का कार्यक्रम शुरू हो जाता. मैंने अपनी उस आंटी को लगातार दो महीने तक कभी बाथरूम तो कभी उनके कमरे तो कभी मेरे कमरे कभी किचन और कभी छत पर भी रात को अँधेरे में चोदकर उसकी चुदाई की प्यास को हर बार शांत किया जिसकी वजह से वो हमेशा खुश रहकर मेरा पूरा ध्यान रखने लगी थी और हमारी वो चुदाई मेरे दो महीने उनके घर रहने तक ही चली. फिर उसके बाद में वहां से चला आया.

Updated: August 22, 2017 — 9:45 am
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