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मेरा नाम सोहन है और मैं गांव में रहता हूं, मेरी उम्र 20 वर्ष की है। मैंने गांव के स्कूल से ही पढ़ाई की है इसलिए मैं पढ़ने में भी ज्यादा अच्छा नहीं हूं। मेरे पिता खेती का काम करते है और वह खेती-बाड़ी कर के ही अपना गुजारा चलाते हैं। मेरी मां और मैं उनके साथ खेत में काम करते हैं। मेरा बड़ा भाई शहर में ही पढ़ाई करता है, उसका नाम सूरज है। उसे शहर में रहते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं और वह बेंगलुरु में रहता है। मुझे अपने माता पिता के साथ रहना ही अच्छा लगता है इसलिए मैं उनके साथ ही खेती का काम करता हूं। मुझे उनके साथ काम करना बहुत ही पसंद है और मैं अपने घर के सारे काम खुद ही कर लिया करता हूं लेकिन मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि तुम अपने भाई के पास शहर चले जाओ। मैंने उन्हें कहा कि मैं शहर जाकर क्या करूंगा, वो कहने लगे कि तुम यदि शहर जाओगे तो तुम्हें अच्छा लगेगा और तुम अपने भाई को भी मिल लोगे। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं देखता हूं कि वह क्या कहता है।

मेरा भाई सूरज मेरे मामा के साथ ही बचपन से शहर में रहता है, वह बेंगलुरु में बहुत ही अच्छे पद पर हैं इसीलिए उन्होंने कहा कि सूरज जब पढ़ने में अच्छा है तो उसे हमारे पास ही भेज दो इसी वजह से मेरे माता-पिता ने उसे बेंगलुरु पढ़ने के लिए भेज दिया और अब वह एक बड़ी कंपनी में भी नौकरी लग गया है। उन्होंने ही उसकी नौकरी के लिए बात की थी और उसने अपना अलग घर भी ले लिया है, जो कि उसे कंपनी के द्वारा ही मिला है। मैंने जब अपने भाई से बात की तो वह कहने लगा कि तुम कुछ दिनों के लिए मेरे पास आ जाओ तो मुझे भी बहुत अच्छा लगेगा। मैंने उससे कहा मैं आना तो चाहता हूं परंतु माता पिता को छोड़ कर आना संभव नहीं है क्योंकि वह बहुत ज्यादा काम करते हैं और उनके काम में मैं थोड़ा मदद कर दिया करता हूं तो उन्हें भी एक सहारा मिल जाता है। सूरज कहने लगा कि कुछ दिनों के लिए तुम यहां पर आ जाओ उसके बाद चाहे तो तुम वापस से चले जाना। मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं सूरज के साथ रहकर ही शहर में कुछ काम करू। मैंने जब बेंगलुरु जाने की तैयारी कर ली तो मेरे पिताजी ने मुझे कुछ पैसे दिए। सूरज ने मेरी टिकट करवा दी थी।

मैं ट्रेन से बेंगलुरु चला गया और जब मैं बेंगलुरु स्टेशन पर पहुंचा तो मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे कहां पर जाना है, उसके बाद मैंने सूरज को फोन किया और कहा मैं बेंगलुरु पहुंच चुका हूं, तुम मुझे लेने के लिए आ जाओ। जब मैंने उससे यह बात कही तो वह कहने लगा कि तुम स्टेशन में ही इंतजार करो मैं तुम्हें लेने के लिए स्टेशन ही आता हूं। जैसे ही सूरज मुझे मिला तो उसने देखते ही मुझे गले लगा लिया और कहने लगा कि तुमसे इतने समय बाद मैं मिल रहा हूं,  मुझे तुमसे मिलकर बहुत ही अच्छा लग रहा है। उसने मुझसे माता पिता के बारे में भी पूछा और मैंने उसे बताया कि वह लोग घर में अच्छे से हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। सूरज कहने लगा हम लोग एक काम करते हैं पहले यहां से सीधा ही हम लोग मामा के घर चल लेते हैं, तुम मामा से भी मिल लेना और उसके बाद हम लोग वहां से मेरे घर चल पड़ेंगे। मैंने  अपने भाई से कहा जैसे तुम्हें उचित लगता है तुम उस हिसाब से देख लो। अब हम दोनों भाई मेरे मामा के घर चले गए। जब मेरे मामा ने मुझे देखा तो वह बहुत खुश हुए और कहने लगे कि तुम तो कभी भी शहर नहीं आते हो, ना ही तुम मुझे कभी फोन करते हो। मैंने उन्हें कहा कि मामा खेती बाड़ी का काम संभालते हुए समय ही नहीं मिल पाता इस वजह से मैं आपको फोन भी नहीं कर सकता था। अब वह मुझसे पूछने लगे कि घर पर तुम्हारे माता-पिता कैसे हैं, मैंने उन्हें कहा कि वह तो बहुत ही अच्छे हैं और आपको हमेशा ही याद करते रहते हैं। मेरे मामा बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं और उनका व्यवहार बहुत ही अच्छा है। मेरी मां उनकी बहुत ज्यादा तारीफ करती है और कहती है कि तुम्हारे मामा का व्यवहार बहुत ही अच्छा है यदि वह सूरज को अपने साथ शहर में ना रखते तो शायद आज सूरज अच्छा पढ़ लिख नहीं पाता।

हम लोग काफी देर तक मेरे मामा के घर पर ही थे क्योंकि उनकी दोनों लड़कियों की शादी हो चुकी है इसलिए वह घर पर अकेले ही अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। मेरी मामी ने हमारे लिए खाना बनाया और हम दोनों ने रात का भोजन वही किया और उसके बाद हम लोग मेरे भाई के घर पर चले गए। जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने उसे कहा कि यह तो बहुत ही बड़ा घर है, तुम यहां पर अकेले कैसे रहते हो और इसका किराया भी बहुत ज्यादा होगा, वह कहने लगा कि इसका किराया मेरी कंपनी ही देती है वह मुझे महीने में मेरा किराया दे देती है। मैंने उसे कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मैं बहुत खुश था जब मैं अपने भाई के घर पर पहुंचा। हम दोनों बैठ कर बातें कर रहे थे उसी वक्त मेरे पिताजी का भी फोन आ गया और वह मुझसे पूछने लगे कि तुम सही सलामत तो पहुंच गए थे, मैंने उन्हें कहा कि हां मैं अच्छे से पहुंच गया था, मुझे किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई। मेरे पिताजी बहुत ही खुश थे और वो कहने लगे यह तो बहुत ही खुशी की बात है कि तुम सूरज के पास हो। उन्होंने अब मेरे भाई से बात की और काफी देर तक वह उससे बात करने लगे उसके बाद उन्होंने फोन रख दिया। हम दोनों अब बात कर रहे थे और काफी देर हो चुकी थी मेरा भाई कहने लगा कि अब काफी देर हो चुकी है सुबह मुझे ऑफिस के लिए भी जाना है इसलिए हम लोग सो जाते हैं।

उसके बाद हम दोनों सो गए और वह सुबह जल्दी उठकर ऑफिस चला गया। जब वह ऑफिस गया तो उसने मुझे फोन कर दिया और कहने लगा कि तुम नाश्ता कर लेना और  तुम टीवी देख लेना, मैं शाम को ऑफिस से जल्दी लौट आऊंगा और मैंने नाश्ता कर लिया था। मैं टीवी देखने लगा लेकिन मेरा समय नहीं बीत रहा था, मैं सोच रहा था मैं क्या करूं तभी मैं बाहर की दुकान पर चला गया। जब मैं वापस लौट रहा था तो मुझे एक लड़की दिखाई दी उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम यहां पर नये आए हो, मैंने उससे कहा कि हां मेरा भाई यहीं पर रहता है, मैं उसके पास ही आया हूं। उस लड़की का नाम राधिका है और हम दोनों काफी देर तक बात करने लगे। मैंने उससे कहा कि यहां पर तो कोई किसी से बात भी नहीं करता है, हमारे गांव में तो सब लोग एक दूसरे के हाल-चाल पूछ लिया करते हैं। मैं बहुत ही बोर हो रहा हूं मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा। वह कहने लगी ऐसी कोई भी बात नहीं है यहां पर सब लोग अपने काम में व्यस्त रहते हैं इसी वजह से शायद वह लोग किसी से बात नहीं करते। राधिका मुझे बहुत अच्छी लगी और जिस प्रकार से उसने मुझसे बात की तो मुझे उससे बात करना बहुत अच्छा लगा। अब शाम को मेरा भाई भी लौट आया था, वह मुझे शहर घुमाने ले गया। हम लोग शहर घूमने के बाद जब वापस लौटे। सुबह फिर वह हमेशा की तरह ही ऑफिस चले जाता और मैं घर में बोर होता था। मुझे जब राधिका मिल जाती तो मैं उससे ही बात कर लिया करता था और हम दोनों काफी देर तक बात करते थे। राधिका का नेचर बात करने में बहुत ही अच्छा था, उससे बात करते हुए मुझे बिल्कुल महसूस नहीं होता था कि मैं बेंगलुरु में अलग रह रहा हूं। हम दोनों की अब अच्छी दोस्ती हो गई थी और वह हमेशा ही मेरा हाल चाल पूछ लेती थी। एक दिन मैंने राधिका से कहा कि हम दोनों हमेशा ही बाहर बातें करते हैं आज तुम मेरे साथ घर पर ही बैठ जाओ। वह मेरे साथ घर पर आई तो हम दोनों बातें कर रहे थे लेकिन उसे देख कर मेरा मूड बड़ा ही खराब होने लगा। मैंने उसकी गांड को कसकर पकड़ लिया जब मैंने उसकी गांड को कस कर दबाया तो वह पूरे मजे में आ गई। उसने तुरंत मेरी पैंट से मेरे लंड को बाहर निकाल लिया और मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर तक लेने लगी वह बड़े ही अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर उतार रही थी जिससे कि मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैंने भी अब उसके सारे कपड़े खोल दिए जब मैंने उसके गोरा और मुलायम बदन को देखा तो उसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया।

मैंने जैसे ही उसके मुलायम और गोरे स्तनों पर अपने हाथ रखे तो वह पूरे मूड में आ गई और मैं उसके स्तनों को दबाने लगा। मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था जब मैं उसके स्तनों को दबाए जा रहा था और वह भी पूरे मूड में आ रही थी। मैंने काफी देर तक उसके स्तनों को दबाना जारी रखा जिससे कि उसे बड़ा मजा आ रहा था। मैंने उसे बिस्तर पर लेटाते हुए उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे उसकी योनि से पानी निकलने लगा। मैंने उसे घोडी बनाते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया उसकी योनि बहुत ही ज्यादा टाइट थी। मुझे उसकी योनि में धक्का मारने में बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि उसकी टाइट चूत को मारने में मजा आ रहा था वह अपनी गोल गोल गांड को मेरे लंड से टकरा रही थी। जब उसकी गांड मुझसे टकराती तो मेरे अंदर से एक अलग ही प्रकार की सेक्स भावना निकल आती। मुझे भी अच्छा लग रहा था जब इस प्रकार से मै उसे चोद रहा था। राधा की गोरी गांड गर्म हो चुकी थी और मेरे अंदर की उत्तेजना भी चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी। उसे भी बहुत मजा आने लगा वह मेरा साथ देने लगी और कहने लगी तुम्हारा तो बड़ा ही मोटा और अच्छा लंड है। मैंने भी उसे बड़ी तेज धक्के मारने शुरू कर दिया उन्ही झटको के बीच में ना जाने कब मेरा वीर्य पतन हो गया। उसके बाद हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे उसके बाद राधा और मेरे बीच में बहुत बार सेक्स संबंध बन चुके हैं।

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