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मेरी कामुक बीवी बनी प्राइवेट रण्डी-7


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hindi chudai ki kahani रेणु अपने चुतड को थोडा और आगे खिस्कादी और अब अपने चुतड को हौले हौले उपर निचे तथा जांघोंको दांये बांये हिलाने लगी. उसकी इस हरकत से उसकी चुत मे हल्का सा दरार दिखने लगा. गजबकी लाली थी उसकी चुत मे. उसके चुत के दरार से रस टपकने लगा था. वह बिलकुल गीली हो गई थी. चुत नृत्य के साथ हि वह अपने एक हाथसे अपनी चुंचियोंको बारी बारी से मसलते हुवे दुसरी हाथकी बिच वाली उन्गलिको आगे निकलकर अपने चुतके तरफ ऐसे हिलाने लगी और आँख मरते हुवे उधर इशारा किया जैसे मनोजसे आकर चोदनेको कह रही हो. मेरा लंड भी अब पानी छोड़ने लगा था.

शायद मनोज से भी और बरदास्त करना मुश्किल हो गया था. वह उठ खड़ा हुवा और बोलाकी मै बाथ रूम होकर आता हूँ.

रेणु ने तुरन्त अपनी साड़ी ठीक करली. मनोजके जानेके बाद मैंने पुछा, ‘क्या दिखा दिया तूने जो बेचारेकी हालत इतना ख़राब हो गया.’

रेणु मेरे कानके पास फुसफुसा कर, ‘बुर दिखा दिया था. शायद वह मुठ मारने गया.’

मैंने रेनुको पकड़कर उसके होंठोंको चुमते हुवे उसकी चुंचियोंको कस कसके मसलते हुवे कहा, ‘तु अब पक्की रण्डी हो गई हो. मन कर रहा है साड़ी उलटके अभी का अभी तेरे बुरमे लौड़ा पेल दूँ.’

रेणु, ‘थोडा और सब्र करो आज रातको मनोजके साथ मिलकर जमके चोद लेना मेरे राज्ज्ज्जा जीईईई.’

मनोजके जानेके बाद थोड़ी देर हम इधर उधरकी बातें करते रहे. फिर हम दोनोने अपना आगेका प्लान तय करनेके लिए बाहर एकान्तमे जाकर डिस्कस करनेको तय किया. घरसे निकल्नेसे पहले रेणु लाल रंगकी पारदर्शी साड़ी ब्लाउज मे ड्रेस अप होकर बड़ी सुन्दर मेकअप किया. लाल पारदर्शी साड़ी मे वह और ज्यादा सेक्सी लग रही थी. साड़ीके उपरसे उसकी चौड़ी गलेकी ब्लाउजके बाहर निकले चुंचियोंका उपरी हिस्सा और पेट तथा नाभिका नज़ारा देखने वालेका लंड खड़ा कर देनेके लिए काफी था. जब वह उसे हमारी बाहर जानेकि बात बताने गई तो मनोज उसे इस रुपमे ललचाई नजरोंसे देख रहा था. रेणु घरसे निकलते निकलते उस पर अपने हुस्नका जादु बिखेरते हुवे बाय बोलकर अपनी कमर लचकाते और गांड मटकाते हुवे चल दी. मनोज दरवाजे पे खड़ा उसके पिछवाड़ेको निहारता हि रह गया.

एक पार्कमे बैठकर बहुत सोंच समझ कर हम दोनोने योजना बनाया और रेणु अकेले घर लौट आयी. घर पहुचने पर उसे अकेला देख मनोजने मेरे बारेमे पुछा तो उसने कह दियाकि एक आध घंटेमे होटल पाराडायिज से खाना पैक कराकर आजाएंगे.

मनोजने उसे बांहों मे भरकर चुम लिया और कहा, ‘तो एक क्विक राउंड हो जाय.’

रेणु, ‘नही यह रिस्की है, वह किसीभी वक़्त आ सकते हैं.’

मनोज, ‘मै बरदास्त नही कर पा रहा हूँ, उनके आनेसे पहले पुरा कर लेंगे. बस आजावो मेरी जान.’ कहते हुवे उसने रेणुकी चुंचियोंको पकड़कर मसलने लगा.

रेणु, ‘तुम क्यों पागल हो रहे हो. थोडा सब्र करो रातमे मै तुम्हारी ख्वाहिश पुरी कर दूंगी.’

मनोज, ‘कैसे सब्र करूँ मेरी जां.’ कहते हुवे उसे अपने बान्होंमे जकड़कर चुमने लगा.

रेणु, ‘देखो मेरी बात मानो अभी रहने दो बादमे खुब मज़े कराती हूँ ना मेरे सजनजी.’

मनोज माननेके मुडमे नही था. उसने रेणुकी होंठोंको चुमने लगा.

रेणु, ‘देखो मुझे छोड़ दो. मै इस वक़्त कोई रिस्क नही लेना चाहती. दिनमे तूने अपने मनकी करली है रात होने दो फिर करा दूंगी.’

किसी तरह वह खुदको मनोजके पकड्से छुड़ाया और आईनेमे अपने आपको निहारते हुवे बोली, ‘देख तूने मेरी मेकअप मेरी लिपस्टिक का क्या हाल कर दिया, ऐसे देख अगर उन्हें शक होगया तो.’

उसने अपनी मेकअप और खास करके लिपस्टिक दुरुस्त किया और उसे सब्र से रहनेको समझाया.

मनोज रेणुके इर्द गिर्द चक्कर काट रहा था. वह बार बार उसे मनानेका कोशिश कर रहा था. कभी कभी वह उसके साथ छेड़छाड़ भी कर देता था. एक बार तो उसने हद हि कर दिया, उसने अपना लंड पैंट मे से निकालकर दीखाते हुवे बोला, ‘देखो ना बिचारेका का क्या हाल हुवा है. देखो यह कैसे आंसु बहा रहा है.’ लंड से टपकते प्रेकम के तरफ उसने इशारा किया.

रेणु उसका लंड पकड़कर उससे निकलते चिपचिपे पानीको पोंछते हुवे बोली, ‘लावो मै इसके अंशु पोंछ कर चुप करा देती हूँ.’

वह मनोजके लंडको सहलाकर चुमते हुवे बोली, ‘रोनेको नही, मै देती हूँ ना अपने राजाको.’

वह उसके लंडको सहलाने लगी. रेणुके मुलायम हांथों का स्पर्श पाकर मनोजका लंड और भी अकड़ कर फौलाद्के जैसा हो गया.

मनोजने रेणुको बेड पर बैठा दिया. रेणु उसके लंडको चुमने और सहलाने मे मशगुल थी. मनोज रेणुके ब्लाउज मे हाथ डाल कर उसकी चुंची मसल रहा था.

दोनो इस काममे इतने मशगुल थे कि उन्हें मेरे आनेका पता हि ना चला. मै उनपे गरजा, ‘हरामजादों तुम ये क्या कर रहे हो.’

दोनो को जैसे सांप सूंघ गया. रेणुके ब्लाउज से अपना हाथ खिंच कर मनोज अपने हांथोंसे अपना लंड छुपाने लगा और रेणु अपनी पल्लु ठीक करने लगी.

रेणु, ‘गलती हो गई हम बहक गए थे, हमें माफ़ कर दो, प्लीज.’

मनोज अपना कान पकड़ते हुवे, ‘माफ़ कर दीजिये आगेसे ऐसी गलती हम दोबारा नही करेंगे.’

कान पकड्नेके चक्करमे लंड परसे उसे अपना हाथ हटाना पड़ा. मैंने देखा उसके लंडका तनाव अब कुछ काम हो गया था और वह निचेके तरफ लटक रहा था. अर्ध उत्तेजित अवस्थामे भी उसका लंड काफी बड़ा दिख रहा था.

मनोज अपना कान पकडे उठ बैठ करके माफीके लिए गिडगिडाने लगा. उसके उठने बैठने पर उसका लंड बार बार हिल रहा था, जिसका उसे जरासा भी होश नही था. मेरे साथ साथ रेणु भी उसके हिलते हुवे लंडको देख रही थी.

मै रेणुके तरफ घूरते हुवे बोला, ‘साली छिनाल, ये तो कुंवारा है बहक गया लेकिन तुम साली कैसे ऐसी ओंछी हरकत कर बैठी.’

रेणु मेरा पैर पकड़ते हुवे, ‘गलती होगयी मैंने घर आनेके बाद इसे अपने फोटोके सामने खड़ा होकर मुठ मरते देख लिया था. इसके हथियारको देख मै ललच गई थी. हमें माफ़ कर दो.’

मै, ‘क्या बोली, हथियार. क्या है इसके हथियार मे जो तु बहक गई रे साली रण्डी.’

रेणु, ‘आप खुद देख कर बतावो ना उस वाली फिल्म मे क्या ऐसा हि हथियार वाला नही था जिसे देख तुम बोले थे कि तेरी चुतको भी ऐसा हि मोटा और लम्बा हथियार चाहिए.’

मै, ‘हरामजादी मौज मस्ती मे मै बोल गया और मौका मिलते हि तूने पकड़ लिया इसका लंड. तुझे इसका लंड पकड़ने मे ज़रा सी शर्म नही आई.’

मैंने मनोजके तरफ घुम कर बलोया, ‘बाहनचोद तु अभी अपने कमरेमे जा साला तेरी खिरियत तो मै बादमे लूँगा, पहले इस रण्डी का खैरियत ले लूँ.’

मनोज फ़ौरन भाग खड़ा हुवा. मैंने रेणुसे दरवाज़ा बन्द करनेको और खिडकियों के परदेको ठीक करनेको कहा. वह दरवाज़ा और खिड़की बंद करके पर्दा ठीक करके आगयी.

अब हम दोनो मुस्करा रहे थे. थोड़ी देर तक मनोजको सुनाने के गरज़ से मै चिल्ला चिल्ला कर दोनोको गाली बकनेका नाटक करता रहा. रेणु भी बार बार गिडगिडाने और माफ़ी मागनेकी नाटक करती रही.

मै धीरे धीरे शांत हुआ. अब मै धीमी आवाजमे रेणुसे बात करने लगा. हम आगेकी योजना के बारेमे बात कर रहे थे. मैंने साड़ी उलटकर देखा तो उसकी बुर अब तक गीली थी.

हमारे योजनानुसार वह मनोजके कमरेमे गई और उससे बोली, ‘मैंने तुम्हे इतना रोका था लेकिन तूने मेरी एक भी ना सुनी. अब देख कितना बड़ा प्रॉब्लम खड़ा हो गया. खैर अब मेरी बात सुन मैंने बड़ी मिन्नत करके उन्हें मना पाई हूँ. अब वह जो कहें चुपचाप मान लेना, इसीमे हमारी भलाई है.’

मनोज, ‘ठीक है वह जैसा कहेंगे मै वैसाही करूंगा.’

रेणु, ‘अब तैयार होकर आजावो मै खाना लगाती हूँ.’

मनोज, ‘आप लोग खा लो मेरी हिम्मत नही हो रही है उनके सामने जाने कि. मै बादमे खा लूँगा.’

रेणु, ‘नही इससे वह और भी भड़क जाएँगे. बस तुम जल्दी से आजावो. डरो नही मै हूँ ना.’

रेणु खाना लगा दी हम तीनो बिना कुछ बोले चुपचाप खाना खा लिए. खानेके बाद मनोज अपने कमरेमे और मै और रेणु अपने कमरेमे चले गए. कमरे मे पहुंचकर मैंने दो कैमरा निकला और छुपाकर उसका फोकस बेड पर सेट करते हुवे दो अलग अलग जगहों पर इस तरह लगा दिया जिससे दोनो साइड से बेड कि हरकत कैमरा मे कैद होजाए. मै कैमरा ऑन करके टेस्ट किया और इत्मिनान करनेके बाद सही जगह पर ऑन करके रख दिया.

रेणु जाकर मनोजको बुला लायी. मनोज डरा हुवा सा आकर सोफे पर बैठ गया.

मै उसे बेड पर आनेका इशारा करते हुवे कहा, ‘वहां नही यहां आकर बैठो, मुझे तुमसे कुछ खास बात करनी है.’

मनोज आकर बेड पर बैठ गया.

मै, ‘तुम्हे रेणु पसन्द है.’

वह बोल पानेकी हालत मे नही था. उसे समझमे नही आरहा था कि बात क्या है और वह क्या जवाब दे. वह चुप हि रहा, कुछ जवाब नही दिया.

मै, ‘खामोश क्यों हो बोलो रेणु तुम्हे पसन्द है.’

उसने ख़ामोशी मे हि सर हिलाकर हां का इशारा किया.

मै रेणु से पुछा, ‘और तुम्हे यह पसन्द है.’

उसने भी हां मे इशारा किया, बिना कुछ बोले.

मैंने फिरसे मनोजसे पुछा, ‘तुम एक हठेकठे नवजवान हो तुम्हे कोई भी जवान लड़की मिल सकती है, फिर इस अधेड़ उम्र औरत मे तुम्हे ऐसा क्या दिख रहा है जो इसके चक्करमे पड रहे हो.’

मनोज डरते डरते, ‘जो चीज़ घरमे हो उसकी क़ीमत का अंदाज़ नही होता.’

मै, ‘अच्छा तो तुम्ही बता दो ना इसमें वैसी क्या है.’

मनोज, ‘रहने दीजिये आप गुस्सा करने लगेंगे.’

मै, ‘नही करूंगा गुस्सा, लेकिन तुम खुल कर साफ साफ बताओ तुम्हे इसकी कौन कौन सी चीज़ आकर्षक लगती है.’

अब मनोजका डर कम होने लगा था, वह खुल कर बोलने लगा, ‘इनकी मुखड़ा बहुत सुन्दर है, फूली फूली गोरे गाल, बड़ी बड़ी शराबी आँखें, पतली कमानीदार भंवें, चौड़ा माथा, फूलोंकी पंखुड़ियों कि तरह मुलायम लाल लाल होंठ, सुराहीदार गर्दन, और …’

उसने अपनी बात अधुरी छोड़ दी. मैंने उसका हौसला बढ़ाते हुवे कहा, ‘हां हां बोलो और क्या.’

मनोज, ‘बड़े बड़े भरे भरेसे बक्ष, समतल मुलायम पेट, गहरी नाभि, मोटी चिकनी कदेली मुलायम जांघें, मोटे नितम्ब, सब कुछ बुल्कुल वैसी है जैसी एक सुन्दर नारीका होना चाहिए और ….’

मै, ‘और.’

मनोज, ‘इनका बनाव श्रृंगार, मस्त चाल, मीठी आवाज़ सब निराले हैं.’

मै, ‘तो तुम इनपे लट्टू हो गए हो.’

मनोज, ‘मै इन्हें पानेके लिए बेचैन हूँ.’

मै, ‘तुम जो चाहो इसके साथ कर सकते हो लेकिन सब कुछ तुम्हे मेरे सामने करना होगा बोलो मंज़ूर है.’

मनोज, ‘हां, मुझे मंज़ूर है.’

मै, ‘और एक और बात तुम्हे इसकी और मेरी पसंद्का भी पुरा खयाल रखना होगा.’

मनोज, ‘ठीक है.’

मै, ‘तो आ जावो मैदान मे अब सोंच क्या रहे हो.’

मनोजको तो जैसे मनका मुराद मिल गया. वह तुरन्त बिना वक़्त गंवाए रेणु को अपनी बांहों मे भर लिया.

मनोज रेणुके पास पंहुचा. पलंगसे उतरकर रेणु किनारेके खडी होगयी. उसने अपनी बांहे खोल रखी थी जिसमे मनोज समा गया. दोनो एक दुसरेको अपने आलिंगन मे बाँध लिए और चुमने लगे. मै सामने सोफे पर जाकर बैठ गया और दोनो का रोमांस देखने लगा.

मेरे सामने बहुत करीब रेणु मनोज से रोमांस कर रही थी. दोनो एक दुसरेको बहुत जोशमे चुम रहे थे. दोनो के होंठ एक दुसरेके होंठ से सटे हुवे थे. रेणुकी हाँथ मनोजके पीठ पर था और मनोजका हाथ रेणुके कमर पर बंधा हुवा था.

मनोज अपने होंठों मे रेणुकि निचलि होंठको पकड़ कर चुसने लगा. रेणु मुह खोले अपनी होंठ बड़े प्यारसे मनोजके होंठों मे दे रखी थी. अब मनोजका हाथ रेणुके सरपे था और वह उसके बलोंको सहलाते हुवे उसका होंठ चूस रहा था.

रेणु अपना जिभ मनोज के मुह मे डालने लगी जिसे अपने मुहमे लेकर वह चुसने लगा. मेरे सामने बहुत करीब रेणु और मनोज एक दुसरेको प्यार कर रहे थे. ऐसा लग रहा था जैसे मेरे सामने किसी फ़िल्मके रोमांटिक दृस्यका फिल्मांकन चल रहा हो.

मनोजका एक हाथ अब रेणुकी चुंची पर पंहुच गया और ब्लाउजके उपरसे हि वह उसकी चुंचिको दबाने लगा. रेणु उसके गालोंको चुमने लगी.

मनोजने रेनुको पलंग पर बैठा उसके गलोको चूमा फिर उसके होंठ रेणुके गालों पर फिसलते फिसलते गर्दनके रास्ते छाती पर पहुंच गया. अब वह रेणुके चुंचियों के बिच के खाही मे अपना मुह घुमा रहा था. रेणु अपने होंठों को चबा रही थी.

मनोजने बारी बारी से रेणुकी दोनो चुन्चियोको चुम्नेके बाद उसके पेट परसे साड़ी के पल्लुको हटाकर पेट पर होंठ रगड़ने लगा. अब वह रेणुकी गहरि नाभि मे अपना जिभ डालकर चाटने लगा. रेणु पलंग पर अपने बांहों के सहारे थोड़ी तिरछी होकर अपनी पेट आगे कर रखी थी.

मनोज पलंग के निचे घुटनेके बाल बैठ गया और रेणुकी साड़ी को उपर उठाने लगा. साड़ी उठा कर वह उसके पैरके अंगूठे को अपने मुहमे लेकर चुसने लगा. रेणु हर पल रोमांचित होती जा रही थी. अब उसने रेणुके पैर पर निचे से उपरके तरफ अपना होंठ रगड़ते हुवे उपरके बुरके तरफका सफ़र सुरु किया और और कुछ हि पल मे उसके होंठ रेणुके निचले होंठों पर पहुंच गए. वह रेणुकी बुर चुमने लगा.

रेणुने अपना पैर खोलकर मनोजके लिए जगह बना दिया था. वह बड़े आराम और प्यारसे रेणुकी बुरको चुम रहा था. मनोज उसके बुरको चुमते चुमते अपना जिभ बाहर निकल कर नोकको रेणुके बुरके दाने पर लगा दिया. रेणु एक दमसे मचल गई. वह अपने चुतड उचकाते हुवे जांघों को खोल दी जिससे उसकि बुर दो फांकों मे बंट गई. मनोज अपना जिभ उसके बुरके दरारमे डालकर घुमाने लगा.

रेणु ने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया. मै उसके पास गया तो वह मुझे खिचकर अपने पास बैठाते हुवे मुझे चुमने लगी. लगता था कि वह ये अवसर प्रदान करनेका धन्यवाद देरही हो मुझे. मैंने भी उसे चूमकर उसे अस्वस्त किया कि लगी रहो.

रेणु पैंट के उपरसे हि मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी. मनोज उसकी बुर चाट रहा था और वह मेरा लंड दबा रही थी. उसने मेरे पैंटका जिपर खोल मेरे तने हुवे लंडको बाहर निकल लिया और उसे अपने हांथों से सहलाते हुवे चुमने लगी. अब वह अपना जिभ मेरे लंड पर घुमा कर चाटने रही थी और मनोज उसका बुर चाट रहा था.

मैं अपना हाँथ उसके ब्लाउज मे डालकर उसके चुंचियोंको मसलने लगा. वह अपने चुतड को उठा कर मनोजके मुह पर दबा रही थी. मनोजने अपने उन्गलियोंसे उसके बुरको फैला दिया और अपना जिभ बुर मे डालकर चाटने लगा. रेणु मेरे लंडको धीरे धीरे अपने मुह मे लेकर चुसने लगी.

मैंने रेणुके ब्लाउज के हुक खोलना सुरु कर दिया और कुछ हि पल मे उसके ब्लाउज को उतर दिया. रेणु खुद हि अपनी ब्रा खोलकर निकल दी. उधर मनोज उसकी साड़ी उतारने लगा. साड़ी उतरने के बाद उसने उसकी पेटीकोट के नाड़ेको खिंच कर खोल दिया और रेणुको पलंगके निचे खड़ा कर दिया. पेटीकोट उसके पैरसे फिसलकर फ़र्स पर गिर गया और अब वह बिलकुल नंगी खडी थी. उसने आज पैंटी पहना हि नही था.

रेणु मनोजके कपडोंको खोलने लगी और इसके साथ हि मै भी अपना कपडा उतारने लगा. कुछ हि देर मे हम तीनो निवस्त्र खड़े थे. मेरा और मनोजका लंड एक दम से खड़ा हो चुका था.

रेणु घुटनेके बाल बैठ कर मनोजके लंडको चुसने लगी और मेरे लंड पर अपना हाथ फेरने लगी. मनोजके लंडको चुसते चुसते बिच बिच मे मेरा लंड भी चुस्ती जा रही थी. मनोज उसके चुंचियों को पकड़कर जोर जोरसे दबा रहा था.

अब मै निचे बैठ रेणुके एक टांग को अपने हाथोसे पकड़कर उठाया और अपना जिभ उसके बुर पर रगड़ने लगा. मनोज उसके मुह मे अपना लंड डाले उसके चुंचियोंको मसल रहा था. वह एक तरफ अपने मुहमे लेकर मनोजका लंड चूस रही थी और दुसरि तरफ मै उसका बुर चाट रहा था.

मैंने उसे पलंग पर किनारेके तरफ बैठा दिया. मै और मनोज अगल बगल मे खड़े होगये. रेणुने हम दोनोका लंड अपने एक एक हाथ मे थामकर सहलाने लगी. वह कभी मेरा लंड चुस्ती तो कभी मनोजके लंड को अपने मुहमे लेलेती थी. एक लंड मुहमे लेकर चुसते समय दुसरे लंडको कसकर पकडे रही थी और कभी कभार अपनी मुठिमे लेकर जोर जोरसे लंडको उपरसे निचे तक रगड़ डालती थी.

कुछ देर बाद वह हम दोनोके बिच फ़र्स पर घुटनेके बाल बैठ कर दोनो के लंडको चुसने और लंड पे मुठ मारने लगी. मनोजने उसके बालोंको पकड़कर उसके मुह मे अपना लंड डालकर कमर हिलाते हुवे अपना लंड पेलना सुरु किया. वह बड़ी तेजीसे रेणुका मुह चोद रहा था. कभी कभी तो वह हद हि पार करने लगा. बड़ी बेरहमिसे रेणुके बालों को अपने हाथों मे जकड़े हुवे उसका सर अपने लंडके तरफ खिचता और जोरसे अपना कमर ठेलकर जड़ तक पुरा लंड उसके मुह में घुसेड देता था. उसका लम्बा मोटा लंड रेणुके हलक तक पहुंच जाता और रेणु के मुहसे गूँगूँ का आवाज़ निकलने लगता था, मानो उसकी दम घुट रही हो लेकिन वह इससे परिसान होनेके बजाय इसका बड़ी मज़े से लुत्फ़ उठा रही थी.

मनोजने उसे उठाकर बेड पर झुका दिया और पिछेसे उसके बुर पर अपना लंड लगाकर घचाकसे अन्दर पेल दिया. उसका आधेसे जयादा लंड रेणुके बुरमे समा गया. उसने अपना लंड थोडा पिछे खिंच कर पुरे ताक़त से अन्दर ठेल दिया. उसका पुरा लंड जड़ तक रेणु के बुरमे चला गया था. अब वह तेज़ झटकों के साथ अपना लंड उसके बुरमे अन्दर बाहर करने लगा.

मै बहुत करीब से उनकि चुदाई देख रहा था. रेणुकी बुर मनोजके लंडको कसके चांपे हुवे थी और उसका लंड रेणुके बुरको चीरता हुवा अन्दर बाहर दौड़ लगा रहा था. रेणुकि चुंचियां निचे लटक कर झूल रहे थे. उसकी हिलती चुंचिया माहौल के मादकता को बढ़ा रहे थे. मैंने अपना हाथ बढाकर उसकी चुंचियोंको पकड़ कर मसलना सुरु कर दिया.

रेणु अपने मुह से आआह्हह्हह्हह्ह आआह्हह्हह्हह्ह उह्हह्हह्हह्हह्ह उह्हह्हह्हह्हह्ह कि मादक आवाज़ निकलने लगी और अपने बुर पर पड़ते मनोजके लंड़का चोट सह्नेके लिए सपोर्ट के लिये मेरा लंड पकड़ लिया. वह बड़ी कसके मेरे लंडको पकडी हुई थी. मेरे लंडको उसने पुरे ताक़त से अपनी मुठी मे भींच रखी थी.

अब मनोजने उसे बिसतर पर पटक कर चित लिटा दिया और खुद उसके छाती पर बैठ गया. उसने अपने हांथों से पकड़ कर उसका सर उपरके तरफ उठाया और मुहमे लंड डालकर जोर जोरसे अन्दर बाहर पेलते हुवे उसका मुह मारने लगा. मै रेणुके टांगों के बिच पहुंच कर अपना लंड उसके बुरमे पेल दिया और गचा गच चोदना सुरु कर दिया. थोड़ी देर तक मनोज रेणुके मुह्को और मै उसके बुरको चोदते रहे.

अब मनोज रेणुके छाती परसे उतरकर उसे करवट लिटा दिया. उसने रेणुके एक टांग उठा कर अपने कमर पर रखा और पीछे से अपना लंड उसके गांड मे पेल दिया. अब वह दाना दान अपना लंड रेणुके गांड मे हूँक रहा था. मै रेणु के मुह्के पास अपना लंड लेजाकर लगा दिया. वह मेरा लंड अपने मुहमे लेकर चुसने लगी. अपने गांड मे तेज गति से दौड़ते मनोजके लंड के वजहसे वह मेरा लंड चुस्नेमे अपने आपको कंसन्ट्रेट नही कर पा रही थी. मेरा लंड मुहसे निकाल कर मुठी मे कसते हुवे वह चिल्लाने लगी. मनोज पुरे स्पीड से उसका गांड मार रहा था.

अब मनोज बिस्तर पर चित होके लेट गया और रेणु को अपने उपर चढनेका इशारा किया. वह मनोजके उपर चढ़ कर उसके लंडको अपने हाथसे पकड़ कर बुरके छेड़ पर लगाकर निचेके तरफ दबाई. मनोज भी अपना चुतड उपरके तरफ उठाया और उसका पुरा लंड रेणुके बुरमे दाखिल हो गया. अब रेणु अपनी कमरको उपर निचे करते हुवे नाचने लगी और मनोजका लंड उसके बुरका बाजा बजाने लगा.

मनोजका लंड सटासट उसके बुरमे घुस रहा था. मनोज अपने हाथ मे रेणुकी चुंचियोंको पकड़कर मसलने लगा फिर अपना हाँथ लेजाकर उसकी कमरको पकड़ लिया और निचे से अपना कमर उचकाते हुवे रेणु के कमरको निचे खींचकर उसके बुरमे अपना लंड पेलने लगा.

मनोज मेरे तरफ घुम कर बोला, ‘देख क्या रहे हो पिछेसे इसके गांड मे अपना लंड पेल दो.’

उसका बात सुनते हि मै पिछे जाकर रेणुके गांड मे अपना लंड पेलनेका कोशिश करने लगा. मेरा लंड बार बार उसके गांड परसे फिसल जाता था और मै अपना लंड अन्दर नही घुसा परहा था. मनोजने अपने हाँथ को रेणु के चुतडों पर लेजाकर उसके गांड को जोरसे फैलाते हुवे मुझे लंड पेलने को कहा. मैंने रेणुके गांड पर ढेर सारा ठुक लगाया और अपने उंगली को उसके गांड मे पेल कर अन्दर के तरफ थूक मिलाया. मैंने अपने लंड पर भी थूक लगाया और लंडको गांडसे भिड़ा दिया.

मेरे लंड़का सुपाडा गांड के अन्दर दाखिल हो गया. अब गांडमे लंड पेलनेका सही एंगल सेट हो गया था. मै अपने लंड का दबाव बढ़ाने लगा और मेरा लंड धीरे धीरे गांड मे घुसता चला गया. करीब दो तिहाई लंड गांड मे दाखिल होनेके बाद मै लंडको अन्दर बाहर करने लगा.

रेणु के गांड मे लंड पेलते हुवे मुझे अपने लंड पे उसके बुर मे घुसे मनोजके लंड का टकराव साफ महशुश हो रहा था. अब मेरा लंड रेणुके गांड मे और मनोजका लंड उसके बुर मे था. वह एक साथ अपनी बुर और गांड मे लंड पेलवा कर अपने दोनो छेदों को चुदवा रही थी.

कुछ देर तक इसी पोजीशन मे मै और मनोज एक साथ रेणुको चोदते रहे. वह खुब जोर जोर से चिल्ला चिल्ला कर चोदवाती रहि. वैसे वह चुदवाते समय हमेशा सेक्सी आवाजें निकाला करती है, उसे खमोश चुदाई पसन्द नही है, लेकिन आज शुरुवात तो उसने खामोश चुदाई से कि थी परंतु अब वह बड़ी तेज आवाजमे बहुतही सेक्सी आवाजें निकल रही थी. वह एक पक्की तजुर्बेकार प्रोफेशनल रण्डी के ररह चिल्ला चिल्लाकर चुदवा रही थी.

रेणु, ‘हाय्य्य्य आऔऊर कस्स्स्सस्स्स्स कस्स्स्सस्स्स्सके हुन्न्न्नक्क्क्कको मेर्रे बुररर औररर गांड मेएएएए अप्प्प्पन्न्ना अप्प्प्पन्न्ना लंन्न्न्नड हाय्य्य्य पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लो पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लतेएएए रररहो हाँ आऔऊर कस्स्स्सस्स्स्स कस्स्स्सस्स्स्सके हुन्न्न्नक्क्क्कको हाय्य्य्य. हाय्य्य्य मेर्रररीईईईईईई बुररर औररर गांड कीईईई प्य्यय्य्य्यय्यास बुझाआआअ दो आज्ज्ज्जज.’

रेणु के मुह से निकलती आवाज़ हि नही उसके मुखड़े का एक्सप्रेशन भी बड़ी कामुक थी. वह मचल मचल कर चुदवा रही थी और हम हुमच हुमच कर चोद रहे थे.

रेणु, ‘हुन्न्न्नक्क्क्कको हुन्न्न्नक्क्क्कको हाय्य्य्य हुन्न्न्नक्क्क्कते रररहो हाय्य्य्य पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लतेएएए रररहो धास्स्स्ससो धास्स्स्ससो अप्प्प्पन्न्ना अप्प्प्पन्न्ना लंन्न्न्नड बुररर औररर गांड मेएएए. हाय्य्य्य मन्न्न्नोज्ज्ज हुन्न्न्नक्क्क्कको मेर्रे बुररर मेएएए. आआअऊ आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह’

रेणुकी चिल्लाहट और उसकी मस्तिको हम दोनोको और पागल बनाये जा रहा था. हर पल हमारे चोदनेका स्पीड बढ़ता हि जा रहा था लेकिन इतने कस कस कर एक साथ दो दो लंड से चुद्वाकर भी इस रण्डी को तसल्ली नही मिल रही थी.

रेणु, ‘च्च्च्चोद्द्द्दो … च्च्च्चोद्द्द्दो … औररर … कस्स्स्सस्स्स्सके … औररर … औररर … कस्स्स्सस्स्स्सके … औररर … कस्स्स्सस्स्स्स कस्स्स्सस्स्स्सके …. पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लो …हाय्य्य्य … पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लतेएएए … रररहो … हाँ … आऔऊर … पेएएएल्ल्ल्ल्ल्लो आऔऊर … आऔऊर … आऔऊर हुम्म्म्मच्च्च हुम्म्म्मच्च्चके …. हुन्न्न्नक्क्क्कको …. हाय्य्य्य …. हुन्न्न्नक्क्क्कको हुन्न्न्नक्क्क्कको, हुन्न्न्नक्क्क्कते … रररहो हाय्य्य्य……..’

चुदवाते चुदवाते अचानक रेणु मुझे ठेल कर अपने गांड परसे हटा दी और खुद मनोजके लंड परसे उठ कर पलटकर मनोज के लंड पर अपनी गांड टिका कर बैठते हुवे उसका लंड अपने गांड मे घुसा लि और मुझे अपना लंड बुर मे पेलने को बोलि. अब मनोज का लंड उसके गांड मे और मेरा लंड उसके बुर मे था. मनोज निचेसे उसका गांड मारने लगा और उपरसे मै उसकी बुर चोदने लगा. तेजी से कमर उच्छाल उच्छाल कर मनोज निचे से उसकी गांड मे अपना लंड हूँक रहा था और उपरसे मै अपना लंड उसके बुरमे सटासट पेल रहा था. उसके बुर और गांड मे अब हम दोनोका लंड पुरी तरह एडजस्ट हो चुका था और हमारा लंड सटासट अन्दर बाहर आ जा रहा था. वह फिर मस्ती मे चिल्लाने लगी.

रेणु, ‘हाय्य्य्य मन्न्न्नोज्ज्ज हुन्न्न्नक्क्क्क स्स्स्ससाल्ल्ल्ला हुन्न्न्नक्क्क्क हाय्य्य्य धास्स्स्ससो … धास्स्स्ससो अप्प्प्पन्न्ना लंन्न्न्नड गांड मेएएए. हाय्य्य्य मन्न्न्नोज्ज्ज हुन्न्न्नक्क्क्कको हुन्न्न्नक्क्क्क स्स्स्ससाल्ल्ल्ला हुन्न्न्नक्क्क्क मेर्रे गांड मेएएए अप्प्प्पन्न्ना लंन्न्न्नड … आआअऊ आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह’

मनोज जो पहलेसे हि बहुत तेज गति से अपना कमर हिला हिलाकर उसके गांड मे अपना लंड ठेल रहा था रेणुके झुंझलाहट भरी चिल्लाहट से उत्तेजित होकर और तेजीसे उसके गांड मे अपना लंड धासने लगा. मनोजका लंड गचागच उसके गांड मे जा रहा था और मै अपना लंड सटासट रेणुके बुरमे पेल रहा था. उसके बुरसे पानीकी धार निकल कर उसकी गांडको तर करते हुवे मनोजके आंड को भी भिगो रहा था. पानी निकलने के वजह से बुरमे लंड पेलने पर फचर फचर कि आवाज़ निकल रही थी. मै और मनोज एक साथ तेज गतिसे हचर हचर उसके बुर और गांड चोद रहे थे.

रेणु, ‘ऊऊऊऊईईईईइमा आह्हह्हह्हह्हह आह्हह्हह्हह्हह प्प्प्परर्मोद्द्द्दद च्च्च्चोद्द्द्दो …. ऊओह्हह्ह …. औररर हुम्मम्म्मच्च्च्च हुम्मम्म्मच्च्च्च के पेलल्ल्ल्ल …. पेलल्ल्ल्ल …. आआअह्हह्हह पेलल्ल्ल्ल अप्प्पना पुररररररा लल्लन्न्न्नड … मेर्रे बुररररररर मेएएए … ठेल्ल्ल्लल … ठेल्ल्ल्लल … हाय्य्य्य … हाय्य्य्य … प्प्प्परर्मोद्द्द्दद औररर … कस्स्स्सस्स्स्सके … औररर ….. औररर हाँ … हाँ … पेलल्ल्ल्ल ….. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह …. पेलल्ल्ल्ल …. ओह्हह्ह …. ओह्हह्ह …. हाय्य्य्य ….. हाय्य्य्य …. प्प्प्परर्मोद्द्द्दद …. प्प्प्परर्मोद्द्द्दद …… प्प्प्परर्मोद्द्द्दद …… हाय्य्य्य …. हाय्य्य्य ….. पेलल्ल्ल्ल …. आआअह्हह्हह …. पेलल्ल्ल्ल … ऊऊऊऊईईईईइमा … ऊऊऊऊईईईईइमा …. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह … ऊऊऊऊईईईईइमा … ऊऊऊऊईईईई … … ऊऊऊऊईईईई … ऊऊऊऊईईईईइमा …. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह … प्प्प्परर्मोद्द्द्दद …. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह …’
मै तो पहले हि उसके बुरमे घचाघच पेल रहा था रेणुके कहने पर और उस रण्डी कि वासना कि ज्वारको देख और हुमच हुमच कर अपना लंड उसके बुरमे हुंकने लगा. मनोज भी दनादन उसके गांड मे अपना लंड घुसेड रहा था.

रेणु, ‘हाय्य्य्य ….. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह … अरररररे …. स्स्स्ससाल्ल्लों …. पेलल्ल्ल्ललो …. पेलल्ल्ल्ललो …. नाआआआआ …. पेलल्ल्ल्ललो …. पेलल्ल्ल्ललो …. भंन्न्नडडडडूऊओ …. ओह्हह्ह …. आह्हह्हह्हह्हह … स्स्स्ससाल्ल्लला … प्प्प्परर्मोद्द्द्दद …. च्च्च्चोद्द्द्द …. च्च्च्चोद्द्द्द …. नाआआआआ … रररररेएएए … स्स्स्ससाल्ल्लला … च्च्च्चोद्द्द्द ….’

हमें समझमे नही आरहा था कि ये भोंसड़ी अब और कैसी चुदाई खोज रही है. हम उसके चिल्लाहटका परवाह किये बगैर बस पुरे ताक़त के साथ चोदाई मे डेट हुवे थे. मै अब झड़ने के कगार पर था और रेणुके बुर और गांड के पतले पार्टीशन से मेरे और मनोजके लंड़का जो स्पर्स हो रहा था उसमे पहले और अब के अंतर से मै समझ चुका था कि वह भी किसी भी पल झड सकता है. हम दोनो झडनेके कगार पर पहुच गए थे. हमारे लंड अकड़ने लगे थे. हमारे लंड तूफान कि तरह रेणु के बुर और गांड को झकझोर के चोद रहे थे.

इतनि जोरदार चुदायिके बाद भी ये रण्डी साली ठंढा होनेका नाम हि नही ले रही थी. हर पल इसकी हवस बढती हि जा रही थी. वह अपने शारीर को हिला हिला कर हमारा लंड अपने भीतर ले रही थी.

रेणु, ‘आह्हह्हह्हह्हह … स्स्स्ससाल्ल्लला … मन्न्न्नोज्ज्ज …. आह्हह्हह्हह्हह … फ्फ्फ्फाड़डडड देएएए …. फ्फ्फ्फाड़डडड देएएए …. स्स्स्ससाल्ल्लला … फ्फ्फ्फाड़डडड देएएए …. मेएएएररररर्री …. गाआअन्न्न्न्न्न्न्ड …. फ्फ्फ्फाड़डडड देएएए ….’

मनोज अपना खुंटे सा मोटा लंड ताबड़ तोड़ रेणुके गांड मे धास रहा था. वह झडनेके कगार पर आगया और बडबड़ाने लगा, ‘हाय्य्य्य साआआआलीईईईईईई रंन्न्नडीईइइ ले ले साआआआलीईईईईईई ले ले म्म्म्ममै ग्ग्गग्यय्या’ और वह रेणुके गांड मे हि अपना ज्वाला छोड़ दिया. मैंने महशुश किया के अब भी उसका लंड रेणुके गांड मे रह रह कर हिल रहा था. मै दनादन उसको चोदता रहा. मेरा लंड घचाघच उसके बुरको चोद रहा था.

रेणु, ‘च्च्चच्च्चोददददददो …. च्च्चच्च्चोददददददो …. आह्हह्हह्हह्हह … च्च्चच्च्चोददददद …. च्च्चच्च्चोदददददके …. रर्न्न्न्नडीइइइई …. ब्ब्बब्बन्न्न्ना … द्द्द्ददो …. साआआआल्ल्ललों …. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह … ऊऊऊऊईईईईइमा … ऊऊऊऊईईईई … ऊऊऊऊईईईई … आह्हह्हह्हह्हह …. आह्हह्हह्हह्हह …. ऊऊऊऊईईईई … ऊऊऊऊईईईईइमा …. आह्हह्हह्हह्हह ….. आह्हह्हह्हह्हह … म्मम्मम्म ….. म्मम्मम्मम …. म्म्म्ममै …. गगईइइइइइइईई …. गगईइइइइइइईई …. आह्हह्हह्हह्हह … म्मम्मम्म ….. म्मम्मम्मम …. म्म्म्ममै …. गगईइइइइइइईई …. आह्हह्हह्हह्हह …’
रेणुके बुरसे गरम लावा निकल पड़ा. उसके बुर ने फव्वारे के तरह पानी उगल दिया और इसके साथ हि मेरे लंड ने भी उसकी बुरमे पिचकारी छोड़ दिया.
हांफते हुवे हम तीनो अलग हुवे लेकिन मनोज रेणु के गांड से निकाल कर अपना लंड उसके मुह पर लगाते हुवे चाट कर साफ करने को कहा. वह उसका लंड चाटने लगी. मै भी साफ करनेके लिए अपना लंड उसके मुह्के तरफ बढ़ा दिया.
रेणुके गांड और बुरसे सफ़ेद बिर्य बिस्तर के चादर पर टपक तटपक कर गिर रहा था.

अगले दिन सुबह्के नास्तेके बाद मनोज अपने कामके सिलसिलेमे गया. मै भी अपने दफ्तरको निकला. शामको जब मै घर लौटा तो देखा रेणु और मनोज दोनो मुह लटकाए रोनी सी सूरत बनाकर बैठे थे. मेरे पुछने पर पता चला कि मनोज जिस होटल मे अपने इंटर्नशिप के लिए आया था उसका दुसरे सहरमे भी एक ब्रांच खुला है. अगर उसे इंटर्नशिप करना है तो उसे वहीँ जाना पड़ेगा और इसके लिए उसे आज हि निकलना पड़ेगा. बहुत सोंचनेके बाद वह वहां जाने का फैसला किया क्यूंकि और कोई उपाय भी नही था. बह अपना सामान पैक करने लगा और आठ बजेके करीब निकल गया.

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