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मेरी बहन चेतना-1


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desi sex kahani हैल्लो दोस्तों, मेरा सुशील है और में भी कुछ सालों से आप सभी की तरह इन सभी सच्ची घटनाओ के मज़े लेता आ रहा हूँ। दोस्तों आज में आप सभी की सेवा में मेरी एक सच्ची घटना को लेकर प्रस्तुत हुआ हूँ और इसको शुरू करने से पहले में अपनी परिचय आप सभी को दे देता हूँ। दोस्तों में अभी कुछ सालों से अपनी एक सरकारी नौकरी की वजह से मुंबई में रह रहा हूँ और वैसे में राजस्थान के बीकानेर का रहने वाला हूँ मेरा बचपन यहीं पर बीता और जब में 10th की पढ़ाई कर रहा था तभी एक सड़क हादसे में मेरी मम्मी पापा की म्रत्यु हो गई और उसके बाद मुझे मेरे परिवार के लोगों ने एक बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया। मैंने अपनी पूरी पढ़ाई वहीं की और मेरे घर पर मेरी जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी मेरे मौसाजी और मौसी को दे दी गई और में अपनी पढ़ाई करता रहा। दोस्तों मेरी एक बहन भी है, वो मुझसे दो साल छोटी है और वो गाँव में ही रहती है। दोस्तों में आज अपने गाँव करीब पांच साल के बाद जा रहा था, मेरी अभी कुछ दिनों पहले नई नई नौकरी लगी थी और इस खुशी की बात की वजह से में सभी के लिए कुछ ना कुछ उपहार लेकर चला था। फिर ऑटो से उतरकर में अपने घर पहुँचा और सबसे पहले मुझे मेरी मौसी मिली, लेकिन चेहरे से देखने पर वो मुझे बहुत ही शांत लगी और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे आने की उन्हे कोई खुशी नहीं हुई हो और अब वो मुझसे पूछने लगी।

मौसी : क्यों बेटा कैसा है? और फिर वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगी थी।

दोस्तों अब मेरी नजरे इधर उधर अपनी बहन को खोज रही थी, मैंने अब अपनी मौसी से पूछ लिया चेतना कहाँ है? वो मुझे कहीं नजर नहीं आ रही है। अब मौसी ने एक आवाज़ लगाई और कुछ देर बाद पर्दे के पीछे से एक लड़की प्रकट हुई और उसको देखकर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गई। फिर मैंने उसको कहा कि अरे तू तो अब इतनी बड़ी हो गयी है और वो मुझसे भैया कहते हुई मेरे गले से लग गयी। दोस्तों में उसके इस तरह से गले लगने की वजह से बड़ा चकित था। उसके बड़े और भारी बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे। फिर मैंने भी उसको अपनी बाहों में भर लिया और मैंने अपनी मौसी से कहा कि चेतना को मैंने जब पिछली बार देखा था तब वो छोटी सी बच्ची जैसी थी। अब मौसी मुझसे कहने लगी कि देखा कितनी बड़ी हो गयी है यह पूरी औरत हो गयी है, लेकिन अक्ल इसमे ढेले भर की भी नहीं है। फिर मैंने उनको कहा कि मौसी आप ऐसे क्यों बोल रही हो यह अभी भी बच्ची ही है, लेकिन चेतना मेरे आने से बहुत खुश थी और वो मेरा सामान लेकर मेरे कमरे में चली आई। अब वो मेरे साथ बैठकर बातें करनी लगी और मैंने देखा कि उसके खुशी की वजह से आँखों से आंसू तक भी निकल रहे थे।

फिर मैंने उसको कहा कि चेतना तुम कितनी बड़ी हो गयी हो? और वो बोली कि हाँ भैया आप भी ना कितने अच्छे लगने लगे हो। दोस्तों सचमुच चेतना जवान होने के साथ ही बहुत सुंदर हो चुकी थी और उसके बूब्स गांड तो बहुत ही कमाल की हो गयी थी और उसकी सुंदरता को में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। फिर मैंने उसको पूछा कि मौसी को क्या हो गया है? तभी चेतना उदास होकर कहने लगी कि बाद में बताउंगी। अब मैंने उसको पूछा क्या बताएगी बोला ना? वो कहने लगी कि में रात को बताउंगी यह बहुत लम्बी कहानी है। फिर मैंने उसको ढेर सारे उपहार दिए जिनको देखकर वो बहुत खुश थी और वैसे उसको लहंगा चुन्नी बहुत पसंद आया और उसी के साथ ब्रा पेंटी भी थी और उन्हें देखकर वो शरमा गयी और मुझसे पूछने लगी भैया यह। अब मैंने उसको कहा क्यों क्या हुआ? वैसे भी यह गाँव में कहाँ मिलते होंगे और वैसे भी यह लहंगा के साथ फ्री मिले है इसलिए अब में इनको कहीं फेंक कर तो नहीं आ सकता था इसलिए ले आया। दोस्तों मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर उसका वो गोरा मुहँ एकदम लाल हो गया और फिर वो मुझसे कहने लगी हाँ चलो ठीक है भैया आपको मेरे लिए यह इतना सुंदर उपहार लाने के लिए धन्यवाद।

फिर हम सभी ने खाना खाया रात को मेरे मौसा जी भी आ गये, वो उस समय दारू पिए हुई थे और मुझे उनका भी व्यहवार कुछ अच्छा नहीं लगा। दोस्तों उनके चेहरे को देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे कि उन्हें मेरा आना अच्छा नहीं लगा। फिर रात को चेतना मेरे कमरे में आ गई और फिर उसने रोते हुए मुझे बताया कि मौसी मौसाजी की नज़र हमारी जमीन पर है और उसने मुझे बताया कि एक दिन वो दोनों आपस में बात कर रहे थे कि अगर सुशील (में) जब पढ़कर वापस आएगा और वो अपनी जमीन के लिए कुछ कहेगा तो हम उसको मार देंगे और साली इस लोंडिया को फार्म पर रखेल बनाकर रखूँगा और फिर उसने मुझे बताया कि मौसाजी की मेरे ऊपर गलत नजर है, वो अक्सर मुझे अपने पास बुलाकर मेरे बदन पर इधर उधर अपने हाथ फेरते है और मौसी भी इस खेल में उनके साथ शामिल है और आपको तो पता है कि मौसी बांझ है, एक बार वो मुझसे कह रही थी कि तू मौसा से मुझे एक बच्चा दे दे में तुझे रानी बनाकर रखूँगी। अब भैया आप ही मुझे बताओ में क्या करूं में अब इस नर्क में एक पल भी नहीं रहूंगी। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ चेतना अब इस नर्क में तो में भी तुझे एक भी पल नहीं रहने दूँगा, लेकिन पहले इन लालची लोगो को सबक तो सिखाना पड़ेगा।

दोस्तों उस समय मेरा गुस्से से बड़ा बुरा हाल था, मैंने शांत रहकर कुछ विचार अपने मन में बनाया और अब अपनी मौसी मौसाजी को भागने का सारा सब मन में सोचकर में तैयार हो गया कि कैसे अब मुझे क्या करना है? फिर अगले दिन मैंने ऑफिस में फोन करके अपनी कुछ दिनों की छुट्टियाँ बढ़ा ली और अगले दिन में और चेतना शहर चले गये। वहाँ पर मेरे एक दोस्त का भाई पुलिसकर्मी है। फिर मैंने उसको अपनी सारी कहानी बताई और उसको कहा कि मेरे मौसाजी मौसी से हम दोनों को जान से मारना चाहते है, हमें उनसे ख़तरा है। फिर हमने वहीं पर एक वकील को बुलाया और हमारे सारे जमीन के पेपर तैयार करवाए और फिर एक एजेंट को बुलाकर हमारी जमीन की कीमत उससे मालूम करवाई और फिर उसको कहा कि कोई हमारी जमीन खरीदने वाला वो देखे। दोस्तों वो सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि पता ही नहीं चला और वो सारा काम खत्म होते होते रात हो गयी। हमारा गाँव करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर था और हम दोनों उस समय मोटरसाइकिल पर थे। फिर हमने सारे पेपर और हमारे लिए कुछ खाने का सामान एक बेग में रख लिया और मैंने चुपके से एक विस्की की बोलत भी ले ली। फिर हम जैसे ही निकले वैसे ही बारिश शुरू हो गयी और वो बारिश धीरे धीरे तेज हो गयी दूरी बहुत ज्यादा थी और वो रास्ता भी सही नहीं था, हम दोनों बारिश की वजह से पूरे भीग चुके थे।

अब चेतना ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया था, इसलिए उसके कठोरे बूब्स मेरी पीठ से टकरा रहे थे और मेरा बड़ा बुरा हाल था। फिर कुछ देर बाद रास्ते में मैंने सड़क के किनारे अपनी गाड़ी को रोक दिया और अब मैंने चेतना से कहा कि वो अब अपने पैर दोनों तरफ करके बैठ जाए, जिसकी वजह से गाड़ी का संतुलन ठीक रहेगा। अब मेरी नजर उस पर पड़ी, उसकी वो सफेद रंग की सलवार कमीज पानी की वजह से एकदम जालीदार हो गयी थी और वो उसके बदन से चिपक चुकी थी और उसके बड़े आकार एकदम गोलमटोल बूब्स मेरी आँखों के सामने जैसे पूरे खुले हुए थे और वो सब देखकर मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था। अब वो द्रश्य देखकर मेरा लंड खड़ा हो चुका था, चेतना ने मुझे ज़ोर से कसकर पकड़ लिया, जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स मेरी कमर से दब रहे थे और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके बूब्स मेरे शरीर को उर्जा दे रहे थे। फिर मैंने मन ही मन विचार बना लिया कि में भी उसको गरम करूंगा और उसके बाद आगे का काम होगा, क्योंकि दोस्तों सहमती से ही संभोग करने में असली मज़ा आता है और आप अंदाज भी नहीं लगा सकते कि में उस समय कितने मज़े में था। अब मेरा लंड अपने पूरे ताव पर था।

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