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जिस्म की जरूरत-22


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hindi sex kahani अपने बेटे विजय के खुले हुए होंठों को चूसते हुए, एक माँ के मुँह से जो वाक्य निकला उसके हर शब्द में सच्चाई थी : “बेटा, हम दोनों हमेशा ऐसे ही किया करेंगे… हाँ सच में बेटा… हाँ…”

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गुड़िया के मुँह से उसकी मम्मी की अपने बेटे से चुदाई की दास्तान सुनने के बाद मेरे लण्ड में भी हरकत होने लगी थी। मेरा भी मन गुड़िया से लण्ड चुसवाने का करने लगा, मैंने अपने वॉलट में से हजार रुपये का नोट निकाला और गुड़िया की चुँचियों को दबाते हुए, और अपने लण्ड को पाजामे में से बाहर निकलाते हुए मैंने गुड़िया को एक हजार रुपये देते हुए पूछा से, “लेकिन तुम तो बता रहीं थीं कि तुमको भी विजय कई बार चोद चुका है, उसकी शुरूआत कब और कैसे हुई, उसके बारे में भी बताओ ना।

गुड़िया मेरे लण्ड को अपने सीधे हाथ में लेकर हिलाने लगी, और अपने मुँह में लेकर चूसने से पहले, उसने अपने भाई विजय से अपनी चुदाई की जो कहानी सुनाई वो कुछ इस तरह थी:

अब आगे की कहानी गुड़िया की जुबानी

मम्मी की विजय से हुई चुदाई के किस्से सुनकर मुझे भी विजय से चुदवाने का मन करने लगा था, जब मम्मी को अपने सगे बेटे विजय से चुदने में कोई एतराज नहीं था, तो मैं तो उस समय कच्ची कली थी, जिसकी चूत में हमेशा खुजली मची रहती थी।

जब विजय और मैंने जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो एक बार मम्मी को हम दोनों को एक साथ अकेला छोड़कर किसी वजह से मामा के घर जाना पड़ा, उस दिन से हमारी जिन्दगी ही बदल गयी। जाने से पहले मम्मी मुझे विजय का ठीक से ध्यान रखने का बोल कर गयी थीं।

मुझे अच्छी तरह याद है, वो जून का महीना था, रात में खाना खाने के बाद, लाईट ऑफ़ होने के कुछ देर बाद ही विजय खिसक कर मेरे पास आ गया और उसने कुछ देर बाद ही विजय ने मेरी पैण्टी में हाथ घुसा दिया था, और मैने भी अपनी टाँगें फ़ैलाकर मेरी पनिया रही चूत के साथ खेलने का उसको भरपूर मौका दिया था। विजय मुझे खींच कर कमरे में ले गया था, और जल्दी से घुटनों के बल बैठकर उसने एक झटके में उसने मेरी पैण्टी उतार कर मेरे घुटनों तक ला दी थी।

मैं खिसक कर बैड के सिरहाने पर सहारा लगा कर बैठ गयी, और अपनी टाँगें फ़ैला दी। विजय ने जब मेरी पैण्टी उतारनी शुरु की तो मैंने भी अपनी गाँड़ उठा दी, और उसे ऐसा करने में उसका सहयोग दिया। विजय मेरी नरम मुलायम और इर्द गिर्द झाँटों के हल्के हल्के बालों से घिरी खूबसुरत चूत को देखकर दीवाना हो गया। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी और फ़ैला दी, जिससे उसको मेरी चूत का और बेहतर दीदार हो सके। जैसे ही मैंने अपनी टाँगें थोड़ा और फ़ैलायीं, मेरी चूत के दोनों होंठ अलग अलग हो गये और मानो मेरी गुलाबी चूत मेरे भाई विजय को सामने देख मुस्कुराने लगी।

विजय का लण्ड उसके पाजामे में तम्बू बना रहा था। विजय ने अपने पाजामे का नाड़ा खोला और पाजामे और अन्डरवियर को नीचे खिसका दिया, उसका लण्ड एकदम लोहे के डण्डे की तरह सख्त हो चुका था, लण्ड का सुपाड़ा फ़ूल कर लाल हो रहा था, जैसे ही विजय अपने लण्ड को मेरी चूत के मुँह की तरफ़ लाया, मैं सिहर उठी। जैसे ही उसने अपने लण्ड को मेरी चूत के होंठो पर रगड़ा, मैं बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी।

जैसे ही विजय ने अपने लण्ड को मेरी चूत में घुसाने का प्रयास किया, मैं दर्द के मारे चील्लाने लगी। मेरी कुँवारी चूत में पहली बार किसी का लण्ड घुस रहा था। कुछ देर प्रयास करने के बाद जब विजय का बड़ा लण्ड मेरी छोटी सी चूत में घुसने में असफ़ल रहा, तो विजय ने ढेर सारा थूक अपने लण्ड के सुपाड़े पर लगा लिया। हम दोनों ने पापा को मम्मी को चोदते हुए ऐसा करते हुए देखा था। विजय की ये ट्रिक कार कर गयी और मेरी चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ अलग अलग होकर विजय के लण्ड का स्वागत करने लगी, विजय के लण्ड का सुपाड़ा और लण्ड भी कुछ ईन्च मेरी चूत में आसानी से अन्दर घुस गया।

मेरा भाई विजय मेरी चूत की चिकनाहट और गर्माहट को अपने लण्ड से मेहसूस कर रहा था, मेरी चूत चुदने को बेकरार होकर बेपनाह पनिया रही थी। विजय का लण्ड मानो कोई गर्म छुरी हो जो अमूल बटर को काट रहा हो। मेरी चुदने को बेकरार चूत उसके लण्ड की पुरी लम्बाई पर चिकने लिसलिसे पानी की एक पतली सी परत चढा रही थी, जिससे उसके लण्ड को और ज्यादा गहराई तक जाने में आसानी हो सके।

किसी रोबोट की मानिंद मेरे भाई विजय की कमर स्वतः ही आगे पीछे होने लगी और उसका लण्ड मेरी चूत में हल्के हल्के धीरे धीरे अन्दर बाहर होने लगा। विजय के लण्ड और मेरी चूत में मानो आग लगी हुई थी। मेरी चूत में विजय के लण्ड के अन्दर बाहर होने से जो घर्षण हो रहा था वो दोनों के बदन में बेपनाह आग रही था। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि क्यों चुदाई रिश्ते नाते मर्यादा सब कुछ भुलाने पर मजबूर कर देती है।

विजय के टट्टों में उबाल आना शुरु हो गया था, और मैं भी अपनी चूत की आग बुझाने के लिये अपनी गाँड़ उठा उठाकर अपने भाई विजय से मस्त चुदाई करवाने में उसका भरपूर सहयोग कर रही थी। एक बारगी जब हम दोनों, की आँख आपस में मिली तो मुझे एहसास हुआ कि विजय अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेलकर मेरी चूत की पूरी गहराई को अपने लण्ड से नाप रहा था। मेरी चूत अब बड़ी आसानी से उसके पूरे लोहे जैसे लण्ड को निगलकर उसके लण्ड के झटकों के साथ खुल और सिंकुड़ रही थी। ये मेरी पहली चुदाई थी, लेकिन मैं अपने भाई विजय के लण्ड के झटकों से ताल से ताल मिलाते हुए कराह रही थी। मेरा भाई विजय मेरी चूत को अन्दर बाहर, ऊपर नीचे तो कभी साईड से, हर तरफ़ से चोद रहा था, और मेरी चूत उसको हर तरह से चोदने के लिये आमंत्रित कर रही थी। अपने माँ बाप और माँ और भाई की चुदाई देख देख कर ही शायद मैं एक्स्पर्ट हो गयी थी। विजय क लण्ड मेरी कुँवारी चूत का भोग करते हुए और मेरे करहाने की आवाज सुनकर मेरी छोटी सी चूत पर और ज्यादा ताबड़तोड़ प्रहार कर रहा था। जो कुछ हो रहा था वो नैचुरल था, मेरी चूत ने शुरु में जो प्रतिरोध किया था, उसे भूलकर वो अब चुदाई में सह्योग कर रही थी।

एक बार थोड़ी जब विजय ने एक जोर का झटका मारा तो मानो मेरी तो जान ही निकल गयी, और मेरे मुँह से बरबस चीख निकल गयी, और मेरी चूत ढेर सारा पानी छोड़कर स्खलित हो गयी। कुछ देर बाद विजय ने मेरी चूत से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। विजय ने जब अपने लण्द और मेरी चूत की तरफ़ देखा तो उसे और मुझे एहसास हुआ कि मेरी कुँवारी चूत की झिल्ली फ़टने से जो खून निकला था उसकी वजह से विजय का लण्ड लाल खून से लिसा हुआ था, और बैडशीट पर भी खून के दाग लग गये थे। मैं अपना कौमार्य अपने सगे भाई से चुदकर खो चुकी थी, जो कुछ हो चुका था उस पर पछताना अब व्यर्थ था।

हम दोनों की साँस अभी भी तेज तेज चल रही थी, लेकिन मेरे भाई विजय का लण्ड का स्पर्श पाते ही मेरी चूत फ़िर से पनियाने लगी और मेरे शरीर में 440 वोल्ट का करेन्ट दौड़ गया। अब मुझे समझ में आ रहा था कि जब पापा मम्मी को चोदते थे तो दोनों के मुँह से वो कराहने की मदमस्त आवाज क्यों और कैसे निकलती थीं।

मेरे चुदने की लालसा फ़िर से बलवती होने लगी थी, मैं बैड पर थोड़ा नीचे खिसक आई और अपनी दोनों टाँगों को अपने दोनों हाथों से उठाकर, अपनी चूत को खोलकर मैं अपने भाई विजय को अपना लण्ड डालकर मुझे चोदने के लिये आमंत्रित और प्रोत्साहित करने लगी। मैंने मम्मी को पापा और विजय से चुदते हुए ऐसा करते हुए देखा था, और विजय ने भी वो ही किया जो उसने पापा को करते हुए देखा था, और जो वो खुद मम्मी को चोदते हुए करता था, उसने अपने हाथ पर ढेर सारा थूक लिया और पहन्ले उससे अपने लण्ड के सुपाड़े को गीला किया और बाकि को मेरी चूत के होठों और छेद के ऊपर घिस दिया, उसके ऐसा करते ही मेरी चूत को चमकने लगी। मेरे भाई विजय की आँखों में भी मेरी चमकती गीली चूत को देखकर एक अजीब चमक आ गयी।

इस बार मेरी चूत ने कोई प्रतिरोध नहीं किया, और विजय का जिद्दी लण्ड एक बार में ही मेरी चूत के अन्दर तक घुस गया। मैंने और मेरे भाई विजय दोनों ने पापा को मम्मी के ऊपर चढकर मिशनरी पोजीशन में ही चोदते हुए देखा था, शायद उस समय तक हम दोनों को किसी और पोजिशन का पता भी नहीं था। लेकिन उसका एक फ़ायदा तो हुआ, हम दोनों एक दूसरे का चेहरा देख पा रहे थे, लेकिन जैसे ही विजय का लण्ड पूरा मेरी चूत में घुसा, मेरी आँखें खुदबखुद बन्द होने लगीं, और वही हाल विजय का भी था, लेकिन जब भी बीच बीच में थोड़ी आँख खुलती तो एक दूसरे के चेहरे के भाव देखकर पता चल जाता कि दोनों को चुदाई में कितना ज्यादा मजा आ रहा था।

विजय अपने लण्ड से मेरी चूत को मूसल की तरह ताबड़ तोड़ कूट रहा था। मेरी चूत की दीवार और ज्यादा फ़ैलती जा रही थी, जिससे विजय का मोटा लण्ड और ज्यादा आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था। मेरे भाई विजय का लण्ड के गहरे झटके मेरी चूत की सुरंग की खुजली मिटा रहा था। मेरी चूत की माँसपेशियाँ कभी टाईट होकर और कभी लूज होकर दर्द और चुदाई के सुख को आत्मसात कर रही थीं। मुझे इस बात पर गर्व हो रहा था कि मैं अपनी चूत की खुजली अपने भाई के लण्ड से मिटा रही थी, ना कि भाग कर किसी बाहरी आवारा लड़के के साथ, इस से घर परिवार की इज्जत पर दाग लगने का कोई खतरा नहीं था।

ये विचार मेरे दिमाग में आते ही और ज्यादा चुदासी हो उठी, और अपनी गाँड़ उठा उठा कर विजय का चुदाई में सहयोग देने लगी। और तभी मेरी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया और मैं स्खलित हो गयी। मेरे भाई को विजय को कुछ समझ नहीं आया और उसने लण्ड का एक जोर का झटका मार कर अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में अन्दर तक घुसा दिया। मुझे मानो जन्नत दिखाई दे गयी।

उस वक्त चुदाई के मामले में मैं और विजय दोनों ही नौ सीखिया थे, हाँलांकि मम्मी को चोदकर विजय मुझसे कुछ थोड़ा ज्यादा जानता था, लेकिन किसी जवान लड़की की कुँवारी टाईट चुत चोदने को उसे भी पहली बार मिली थी। कहाँ मम्मी का ढीला ढाला भोसड़ा और कहाँ मेरी टाईट कुँवारी चूत, हल्की झाँटों से घिरी मेरी कुँवारी चूत देखकर वो भी पागल हो गया था। झड़ते हुए हुए जब मेरी चूत की माँस पेशियों ने मेरे भाई विजय के लण्ड को निचोड़ना शुरु किया, तो उसकी गोलियों में भी उबाल आने लगा। उसने तुरंत अपना लण्ड मेरी चूत में से बाहर निकाल लिया और तभी उसके लण्ड से वीर्य की जो पिचकारी निकली उसने मेरे पेट, मेरी चूँचियों और मेरे चेहरे सभी को अपने पानी से तर बतर कर दिया। मैं विजय के लण्ड को अपने एक हाथ की मुट्ठी में लेकर आगे पीछे करने लगी, और उसके लण्ड को अपनी चुँचियों और निप्पल पर रगड़ने लगी, जिससे उसके वीर्य की आखिरी बूँद तक बाहर निकल जाये। मैं इस बात से खुश थी कि उसने समय रहते अपना लण्ड बाहर निकाल लिया, मैं किसी भी शर्त पर गर्भवती नहीं होना चाहती थी॥

और उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया। जब कोई लड़की एक बार कौमार्य खो देती है तो वो लड़की और ज्यादा बेशर्म हो जाती है। गुड़िया मेरी तरफ़ देखकर थोड़ा मुस्कुरायी, और फ़िर हँसते हुए बोली, इसीलिए उस दिन के बाद जब भी आपने हजार के तीन नोट दिखाये, मैंने भी अपनी चूत खोल कर आपको दे दी। मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया, और उसे पैण्ट की जेब से दो और हजार के नोट दिखाकर मुस्कुराने लगा।

मुझे मुस्कुराते हुए देखकर वो बोली, अब ज्यादा मत मुस्कुराओ विशाल बाबू, आपको शायद पता नहीं है कि आपकी गिफ़्टी दीदी एक बार मुझे आपक लण्ड चूसते हुए छुप कर देख चुकी हैं। पिछले हफ़्ते वो जॉब से जल्दी आ गयीं थीं और वो अपनी चाबी से मेन गेट का दरवाजा खोलकर अंदर आकर हमारी चुदाई देख चुकी हैं। चुदने के बाद आपको सोता हुआ छोड़कर जब मैं किचन में बर्तन साफ़ करने जा रही थी, तो मुझे दीदी के रूम से कुछ आवाज सुनाई दी, जब मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोल कर देखा तो दीदी बैड पर नंगी होकर अपनी चूत मे उँगली कर रही थी। जब मैं घर का सारा काम खत्म करके मेन गेट खोलकर जाने लगी, तो वो अपने रूम के डोर पर खड़ी होकर मुझे घूर रहीं थीं। हाँलांकि इस बारे में उन्होने मुझसे कभी कोई बात नहीं की है, और शायद मेमसाहब को भी कुछ नहीं बताया है। लेकिन सावधान रहना। गुड़िया की ये बात सुनकर मेरे पैरों के तले से तो मानों जमीन ही खिसक गयी।

गुड़िया बोली ये दो हजार के नोट अपनी जेब में वापस रख लो, बस एक हजार लण्ड चूसने के दे दो, जीजू भी लन्दन से आने वाले हैं, शायद वो दीदी को कम्पनी से साथ लेते हुए ही आयेंगे। अगर दीदी और जीजू जल्दी आ गये तो हम दोनों की खैर नहीं, जब कभी सब लोग कहीं बाहर गये होंगे तब इत्मीनान से तुमसे चुदवाऊँगी।

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