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दोस्त की साली को अपने मोटे लंड की सैर करवा दी


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मेरा नाम राकेश है मैं सूरत में रहता हूं, मेरी उम्र 32 वर्ष की है। मैं अपनी फैमिली के साथ ही सूरत में काफी समय से रह रहा हूं। मेरे पापा का सूरत में कपड़ों का काम है और वह महिलाओं के कपड़ों का काम करते हैं। उन्हें यह काम करते हुए काफी समय हो चुका है और मेरा छोटा भाई भी उनके साथ ही काम संभालता है और मैं बैंक में नौकरी करता हूं। मेरे पापा ने मुझे कई बार कहा कि तुम शादी क्यों नहीं कर लेते, मैंने उन्हें कहा कि मुझे अभी शादी नहीं करनी है क्योंकि मैं अपने आप को थोड़ा समय देना चाहता हूं, उसके बाद ही मैं शादी करूँगा। मेरे बैंक में ही एक लड़की थी जिसका नाम आकांक्षा था उसके और मेरे बीच में रिलेशन था, परंतु कुछ दिनों बाद ही उसका रिलेशन किसी और लड़के से हो गया और उन दोनों की शादी हो चुकी है, इसी वजह से मैंने अब शादी का इरादा फिलहाल छोड़ दिया है क्योंकि मुझे कोई भी लड़की अभी तक ऐसी नहीं मिली जिससे मैं दिल से प्यार कर सकू या फिर वह मुझे समझ पाए इसलिए मैं अपने घरवालों को मना करता हूं कि अभी मैं फिलहाल शादी नहीं करना चाहता, जब सही समय होगा तो मैं शादी कर लूंगा।

मेरे माता-पिता ने भी मुझे बोलना छोड़ दिया है और मैं सुबह अपने घर से बैंक के लिए निकलता हूं और शाम को जब मैं ऑफिस से लौटता हूं तो उस वक्त मेरा दोस्त रमेश मुझे मिल जाता है जो कि हमारे पड़ोस में ही रहता है, उसकी और मेरी दोस्ती को एक वर्ष हो चुका है। हम दोनों के बीच में काफी अच्छी दोस्ती हो गई क्योंकि वह भी बैंक में ही काम करता है परंतु वह दूसरे बैंक में है। जब उसे पता चला कि मैं भी बैंक में ही जॉब करता हूं तो वह खुश हो गया। वह मेरे मोहल्ले में ही रहता है। उसकी पत्नी का नाम रोशनी है और वह भी उसी के साथ रहती है। रमेश बनारस का रहने वाला है, उसे सूरत में आए हुए अभी ज्यादा समय नहीं हुआ था क्योंकि जब उसकी जॉब लगी उसके कुछ समय बाद ही उसका ट्रांसफर सूरत हो गया और उसे सूरत में डेढ़ वर्ष हो चुका है। जब भी मैं शाम को अपने बैंक से लौट था तो उस वक्त रमेश मुझे मिल जाता और हम दोनों बैंक से साथ ही घर आया करते थे।

हम दोनों की कई मुद्दों पर चर्चाएं होती थी क्योंकि रमेश की समझ बहुत अच्छी थी और वह कई मामलों का जानकार था। रमेश हमेशा मुझे कहता था कि मैं जॉब नहीं करना चाहता था परंतु मेरी घर की स्थिति ही ऐसी हो गई इस वजह से मुझे नौकरी करनी पड़ी, नहीं तो मैंने कुछ और सोचा था। रमेश बोलचाल में भी बहुत अच्छा था और वह काफी समझ रखता था इसलिए उसकी और मेरी बहुत जमती थी। कई बार मैं उसके घर पर भी चला जाता था। रोशनी का नेचर बहुत ही अच्छा है और वह मुझे भैया कहकर बुलाती है क्योंकि वह मुझसे छोटी है और उसकी उम्र मुझसे कम है इसी लिए वह मुझे भैया कहकर बुलाती है। एक बार रमेश को कुछ पैसों की आवश्यकता थी तो उसने मुझे कहा कि मुझे कुछ पैसों की आवश्यकता है जो कि मुझे घर भेजने हैं इसीलिए मैंने उसकी उस वक्त मदद कर दी और जब मैंने उसकी मदद की तो उसके बाद से वह मेरा बहुत ही एहसान मानता है। रमेश का भी मेरे घर पर आना जाना होता है क्योंकि उसे मेरे घर में सब लोग अच्छे से पहचानते हैं इसी वजह से उसका अक्सर मेरे घर पर आना जाना लगा रहता है। रमेश मुझे कहने लगा कि मेरी पत्नी का जन्म दिन नजदीक आ रहा है तो मुझे उसके लिए कुछ गिफ्ट लेना है और उसके लिए एक पार्टी अरेंज करनी है। मैंने उसे कहा यह तो बहुत अच्छी बात है और उसके बाद हम दोनों ने ही उसके लिए एक हॉल बुक करवा दिया और उसके जितने भी गेस्ट आने वाले थे उनका पूरा बंदोबस्त कर के रख दिया। रोशनी का बर्थडे था तो वह बहुत खुश दिखाई दे रही थी और उसी वक्त उसकी बहन भी आई हुई थी। रमेश ने मुझे उसकी बहन से मिलाया उसकी बहन का नाम सुरभि है। जब रमेश ने मुझे उससे मिलवाया तो मुझे वह बहुत अच्छी लगी और उसके बात करने के तरीके से मुझे वह बहुत ही समझदार प्रतीत हो रही थी।

मेरी उससे जितनी भी बात हुई,  हम दोनों ने अच्छे से बात की और हम लोगों ने रोशनी की पार्टी को बहुत ही इंजॉय किया। सुरभि भी मेरे साथ ही रही और वह मेरे साथ डांस भी कर रही थी। वह बहुत ही खुले विचारों की थी इसलिए उसे किसी भी प्रकार से शर्म नहीं आ रही थी और वह खुलकर मेरे साथ डांस कर रही थी। रमेश ने जब मुझसे यह बात कही कि तुम दोनों की जोड़ी बहुत अच्छी लग रही है तो मैंने उसे कहा कि मैं फिलहाल शादी नहीं करना चाहता क्योंकि मैंने रमेश को भी अपनी गर्लफ्रेंड आकांक्षा के बारे में बता दिया था लेकिन कहीं ना कहीं रमेश चाहता था कि मेरी शादी सुरभि से हो जाए क्योंकि रमेश को मेरा नेचर अच्छे से मालूम था और उसे पता था कि मैं एक अच्छा व्यक्ति हूं। अब सुरभि उनके घर पर कुछ समय तक रुकने वाली थी इसलिए जब भी मैं रमेश के घर पर जाता तो मेरी मुलाकात सुरभि से हो जाती। हम दोनों की मुलाकात अब काफी होने लगी थी इस वजह से हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से पहचानने लगे थे और हम दोनों की काफी बातें होने लगी। मुझे रोशनी ने भी इस बारे में जिक्र किया और कहने लगी कि आप और सुरभि की जोड़ी वाकई में अच्छी लगती है यदि आपको ऐतराज ना हो तो मैं अपने घर में बात कर लेती हूं लेकिन मैंने उसे कहा कि मुझे कुछ समय चाहिए उसके बाद ही मैं इस बारे में कुछ सोच पाऊंगा। सुरभि और मैं अब अक्सर मिला करते थे और उसी दौरान हम दोनों घूमने भी चले जाया करते थे।

एक दिन रमेश और रोशनी मुझसे कहने लगे कि हम लोग कहीं घूमने चलते हैं, मैंने उन्हें कहा कि ठीक है तुम लोग अपना प्लान बना लो और मुझे बता देना। अब हम लोग मेरी छुट्टी के दिन घूमने चले गए और जब हम लोग गए तो रमेश कार ड्राइव कर रहा था और रोशनी उसके साथ ही बैठी हुई थी। सुरभि और मैं पीछे वाली सीट में बैठे हुए थे और हम सब आपस में बात कर रहे थे। मुझे भी कहीं ना कहीं ऐसा लगने लगा कि सुरभि से बात करते हुए मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है और वह मुझे अच्छे से समझने लगी है। उस दिन हम सब ने बहुत इंजॉय किया और जब हम लोग घर वापस लौटे तो हम लोग एक दूसरे की फोटो देख रहे थे क्योंकि हमने उस दिन बहुत सी फोटो अपने मोबाइल से ले ली थी। मैं जब घर आया तो मैं अपने मोबाइल पर सुरभि की फोटो देख रहा था और मुझे अंदर से कुछ अच्छा लगा, मैं भी सुरभि से बहुत ही आकर्षित होने लगा था और मुझे भी उससे बात करना अच्छा लग रहा था। अब हमारी मुलाकात ऐसे ही होती रही और हम दोनों अब करीब आ चुके थे। मुझे नहीं पता था कि मैं इतनी जल्दी सुरभि के करीब आ जाऊंगा और वह मुझे इतनी जल्दी समझ जाएगी। रामेश और रोशनी को भी इस रिश्ते से कोई एतराज नहीं था इसी वजह से मैं अब सुरभि से उसके घर में मिल सकता था। मेरा उसके घर पर आना जाना लगा रहता था और मैं अपने ऑफिस से आने के बाद अक्सर रमेश के घर ही चला जाता था और सुरभि के साथ बैठकर कॉफी बातें करता था। मुझे भी उससे बातें करना बहुत अच्छा लगता है और सुरभि भी हम दोनों के रिलेशन से बहुत ही खुश थी। मैं जब रमेश के घर पर गया था उस दिन रमेश और रोशनी सब्जी लेने के लिए बाजार गए हुए थे। मैंने सुरभि से पूछा कि रमेश और रोशनी कहां है वह कहने लगी कि वह तो बाजार गए हुए हैं। सुरभि ने एक बहुत छोटा सा निक्कर पहना हुआ था जिसमें उसकी गांड साफ साफ दिखाई दे रही थी जब मैंने उसकी गांड को अपने हाथ से दबाया तो उसे अच्छा लगने लगा वह अपनी गांड को मेरे लंड से टच करने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब उसकी गांड मेरे लंड  से टच हो रही थी उसे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था।

जब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया तो उसने तुरंत ही मेरे लंड को अपने हाथ में निकालते हुए अपने मुंह के अंदर समा लिया। पहले वह अच्छे से मेरे लंड को चूस नहीं पा रही थी लेकिन धीरे-धीरे उसने अपने मुंह से मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया। वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी काफी देर तक उसने मेरे लंड को चूसने पर लगी हुई। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो उसके मुंह से आवाज आने लगी। मैने एक ही झटके में अपने लंड को उसकी चूत मे डाल दिया और उसकी योनि से खून भी निकलने लगा मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी 18 साल की लड़की को चोद रहा हूं। मैंने उसे धक्के मारे तो मेरे अंदर की उत्तेजना बढ़ने लगी थी और उसका शरीर गर्म होने लगा। मुझे इतना मजा आ रहा था उसे धक्के मारने मे उसके मुंह से बड़ी तेजी से आवाज निकलती जाती। वह अपनी मादक आवाज से मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी काफी देर तक मैंने सुरभि को ऐसे ही चोदा उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया। उसने मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूसा और काफी देर तक उसने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसना जारी रखा। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और घोड़ी बनाने के बाद मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जब मेरा लंड उसकी योनि में घुसा तो उसे बहुत अच्छा लग रहा है मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जा रहा था। मैंने उसे इतनी तेज तेज धक्के मारे कि उसके मुंह से आवाज निकलती जाती और वह पूरे मूड में आ जाती। वह भी  अपनी चूतडो को मुझसे मिलाने लगी उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी मैं उसकी गर्मी को ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाया और मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसकी चूतडो के ऊपर अपने माल को गिरा दिया। उसने अपने दोनों हाथों से मेरे वीर्य को अपने पूरी चूतडो के ऊपर फैला लिया।

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