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चूत दोगी तो मै पैसे दूंगा


Hindi sex stories, desi chudai ki kahani मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं मेरे माता पिता ने मुझे कभी भी कोई कमी नहीं की परंतु उसके बावजूद भी मेरे सपने बहुत बड़े थे मैं हमेशा चाहती थी कि मेरी जिस से भी शादी हो उसके पास बड़ी सी गाड़ी और बड़ा सा बंगला हो। मैं हमेशा सपने में ही जिया करती थी लेकिन हकीकत में तो जिंदगी कुछ और ही थी जब मेरी शादी आकाश के साथ हुई तो मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मैं आकाश से शादी करूं। आकाश हालांकि दिल के बहुत अच्छे हैं लेकिन मैं आकाश के साथ शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि वह भी मध्यमवर्गीय परिवार से ही हैं मैंने अपनी मम्मी से कहा था कि मुझे अभी शादी नहीं करनी लेकिन मेरा कॉलेज खत्म होने के बाद ही उन्होंने मेरी शादी आकाश के साथ तय कर दी। जब मेरी सगाई हो गई तो उस वक्त मैं बहुत ज्यादा परेशान थी और उस बात से मैं बिल्कुल खुश नहीं थी मैंने अपनी मम्मी से उस वक्त भी कहा कि मुझे आकाश के साथ शादी नहीं करनी।

आकाश और मैंने अपनी सगाई के बाद बात ही नहीं की थी हम दोनों एक दूसरे से बात नहीं किया करते थे मेरी सगाई आकाश के साथ हो चुकी थी लेकिन उसके बाद भी मैंने आकाश से काफी समय तक बात नहीं की। कुछ समय बाद मुझे एहसास हुआ कि इसमें आकाश की क्या गलती है इसलिए मैंने अब इन सब चीजों को अपने दिमाग से निकाल दिया मैंने सोचा जो मेरे जीवन में होना होगा वह हो जाएगा। मैंने अपनी किस्मत पर सब कुछ छोड़ दिया कुछ समय बाद मेरी शादी आकाश के साथ हो गई मेरे पिताजी से जितना हो सकता था उन्होंने मेरी शादी में उतना किया मेरी शादी आकाश से हो गई थी आकाश के परिवार में उसके पापा मम्मी और उसकी एक बहन है। हालांकि शादी के बाद आकाश ने मेरा बहुत ध्यान रखा हम दोनों एक दूसरे का साथ दिया करते मैं अपने सपनों को भूल चुकी थी क्योंकि उन सब चीज का कोई मोल नहीं था। मेरी शादी हो चुकी थी शादी के एक वर्ष बाद ही हमें एक लड़का हुआ और उसके बाद भी हमें एक और लड़का हुआ शादी को कब 10 वर्ष हो गए कुछ पता ही नहीं चला समय इतना तेजी से निकला कि मुझे तो कुछ मालूम ही नहीं चला।

अब हम दोनों के ऊपर बहुत जिम्मेदारियां आ चुकी थी आकाश की बहन की शादी हो चुकी थी और अब सारा दारोमदार आकाश के ऊपर ही था जैसे जैसे हम लोगों का परिवार बढ़ता जा रहा था तो वैसे ही हम दोनों के खर्चे भी बढ़ने लगे थे और परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होने लगी। आकाश के पिताजी का भी देहांत हो चुका था आकाश के ऊपर ही घर की सारी जिम्मेदारियां थी मेरी सासू मां की भी तबीयत ठीक नहीं रहती थी और वह अक्सर बीमारी रहती थी। मैं बहुत ज्यादा परेशान रहने लगी थी आकाश और मेरे बीच में कभी भी झगड़े नहीं हुए आकाश ने हमेशा मुझे प्यार किया और इसी बात से आकाश का साथ हमेशा दिया करती थी। हम दोनों के बीच बहुत अच्छी बॉन्डिंग थी और हम दोनों एक दूसरे को हमेशा समझते लेकिन थे। आकाश के ऊपर घर की जिम्मेदारियों का ज्यादा ही बोझ होने लगा तो मुझे भी लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए तभी मैंने भी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने की सोची और मैं घर में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी। हमारे आस पड़ोस के बच्चे मेरे पास ट्यूशन पढ़ने आया करते थे और मुझे जो भी पैसे मिलते मैं वह आकाश को दे दिया करती जिससे कि हमारे घर का खर्चा अच्छे से चल जाया करता था। आकाश और मेरे बीच बहुत प्यार है हम दोनों अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं हम अपने बच्चों को कोई भी कमी नहीं होने देते हम लोगों ने काफी मेहनत की और अब हम लोग अपने बच्चों को एक अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए भेजने लगे थे। हम लोगों ने अपना पुराना घर बेच दिया था और हम लोगों ने एक नई कॉलोनी में घर खरीद लिया था वहां पर सारे ही अच्छे लोग रहा करते थे। हम लोग नई सोसाइटी में आकर बहुत खुश थे मैंने आकाश से कहा हम दोनों ऐसे ही मेहनत करते रहेंगे और अपने परिवार को आगे बढ़ाएंगे हमारे आस पड़ोस में काफ़ी अच्छे लोग रहा करते थे।

हमारे पड़ोस में भी मेरी अच्छी बातचीत होने लगी थी मैंने अपने घर में ही एक छोटा सा ट्यूशन सेंटर खोल लिया था हमारे आस पड़ोस के बच्चे मेरे पास आया करते थे मैं अच्छी सोसाइटी में रहती थी इसलिए बच्चों की फीस भी ठीक थी जिससे कि मेरा खर्चा निकल जाया करता था। आकाश का भी प्रमोशन हो चुका था आकाश की भी सैलरी बढ़ने लगी थी मैं हमेशा ही आकाश से कहती कि हम लोग एक गाड़ी खरीदेंगे। मैं कार खरीदना चाहती थी हमारे पास कार थी लेकिन मुझे बड़ी कार चाहिए थी और मेरा यह सपना बचपन से ही था लेकिन हम लोग इतना पैसा नहीं जमा कर पा रहे थे। मुझे अब ऐसा लगने लगा था कि मुझे अपने सपनों को सच करने के लिए खुद ही कुछ करना पड़ेगा अब मैं सिर्फ बच्चों को ट्यूशन ही नहीं पढ़ाई करती थी उसके अलावा मैंने एक प्राइवेट स्कूल भी ज्वाइन कर लिया था परन्तु उसमें से भी हमारे सपने सच होने वाले नहीं थे। मेरा सपना था कि हमारा एक बड़ा सा बंगला हो और बड़ी सी गाड़ी हो और हमारे पास अच्छा खासा बैंक बैलेंस हो लेकिन इतनी मेहनत करने के बावजूद भी हम लोग उस तक कभी पहुंच ही नहीं पाए। मैं हमेशा ही सोचती रहती कि कब हमारे सपने सच होंगे। जब भी आकाश फ्री होते तो हम दोनों इस बारे में जरूर बात किया करते थे, आकाश मुझे कहते कि हमेशा जीवन में धैर्य रखना चाहिए सब कुछ ठीक हो जाएगा। पहले भी तो हम लोग एक छोटे घर में रहते थे और अब हम लोगों ने बड़ा घर ले लिया है समय के साथ साथ हमारी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होता रहेगा।

मैंने आकाश से कहा मेरे भी कुछ सपने हैं  मैंने भी बचपन से कुछ सपने देखे थे जो कि मैं सच करना चाहती हूं लेकिन मेरे सपने तो जैसे सच होने का नाम ही नहीं ले रहे हम दोनों इतनी मेहनत करते हैं उसके बावजूद भी हम दोनों अपनी जिंदगी नही जी पा रहे हैं। आकाश कहने लगा तुम बिल्कुल सही कह रही हो क्या हम लोग इस बीच कहीं घूमने के लिए चलें। आकाश ने संडे के दिन घूमने का प्लान बना लिया पहले हम लोग बच्चों को मूवी दिखाने के लिए ले गये काफी समय बाद आकाश और मैं साथ में मूवी देख रहे थे मैं आकाश की तरफ देख रही थी और आकाश बड़े मजे से मूवी का आनंद ले रहे थे। उसके बाद हम लोग वहां से हमारे शहर के पार्क में चले गए वहां पर काफी भीड़ थी दोपहर का लंच हम लोगों ने वहीं पर किया। बच्चे पार्क में झूला झूल रहे थे और हम दोनों आपस में बात कर रहे थे मैं बच्चों की तरफ देख रही थी क्योंकि मुझे डर था कि बच्चे कहीं इधर-उधर ना चले जाएं इसलिए मेरा ध्यान सिर्फ बच्चों की तरफ था। हालांकि आकाश मुझसे बात कर रहे थे मैं उनकी बातों का जवाब भी दे रही थी लेकिन मेरा ध्यान बच्चों की तरफ ज्यादा था। हम लोग सब शाम को घर लौटे तो आकाश मुझे कहने लगे आज अच्छा रहा? मैंने आकाश से कहा हां आज तो सब कुछ अच्छा रहा और मुझे बहुत ही अच्छा लगा। इतने समय बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ में समय बिता रहे थे तो हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था हम दोनो वहां से घर लौट आए थे। हम लोग काफी थक चुके थे इसलिए आकाश ने उस दिन खाना बाहर से ही ऑर्डर करवा लिया हम लोगों ने खाना खाया और हम सो गए।

हमारे जीवन में सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन एक दिन मैं अपने घर से बाहर जा रही थी तो मैंने अपने पड़ोस में देखा कि एक बड़ी सी गाड़ी खड़ी है मैं उसे देखने लगी, गाड़ी में काले शीशे लगे हुए थे अंदर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था पर शायद अंदर कोई बैठा हुआ था। जब गाड़ी का दरवाजा खुला तो अंदर से एक नौजवान युवक निकला उसकी उम्र 28, 30 वर्ष के आस पास की रही होगी उसने मुझे कहा भाभी जी आप ऐसे गाड़ी को क्यों देख रही है। मैंने उसे पूरी बात बताई वह मुझे कहने लगी मैं आपको अपनी कार की शैर करवाता हूं पहले तो मुझे बड़ा ही अजीब सा लगा लेकिन फिर मैं कार के अंदर बैठ गई। मैं कार में बैठ गई थी और वह लड़का मुझे काफी आगे तक ले आया था मैंने उसे कहा अब वापस चले तो वह कहने लगा आपके साथ क्या मे सेक्स कर सकता हूं। मै उसकी तरफ देखने लगी उसने जब मेरी जांघ पर हाथ रखा तो मैं समझ गई कि उसे क्या चाहिए मैं दुविधा में थी लेकिन मैंने भी उसके बाद मान लिया। जब उसने मुझसे कहा कि क्या कहीं चले तो मैंने उसे कहा नहीं कार में हम लोग सेक्स करेंगे उसने मेरे होठों को चूमना शुरू किया।

हम लोग पीछे की सीट में चले गए उसने मेरे स्तनों का रसपान भी काफी देर तक किया और उसके बाद उसने जब मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे भी मजा आने लगा मेरी योनि से गिला पदार्थ निकलने लगा। मैं पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी जैसे ही उसने अपने मोटे लंड को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो मैं उत्तेजित हो गई और उसका पूरा साथ देने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था उसने मेरे दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और बड़ी तेजी से मुझे धक्के मारता जाता। मैंने भी अपने पैरों को चौड़ा कर लिया और वह मेरा चूत का मजा बड़े अच्छे से ले रहा था काफी देर तक उसने मेरे साथ संभोग किया, जब उसने अपने वीर्य को मेरे मुंह के अंदर गिराया तो मैंने उसे अंदर ही ले लिया वह बहुत ज्यादा खुश था और मुझे भी बहुत खुशी हुई। मैंने उसे कहा अब बताओ तुम मेरे सपनों को कैसे पूरा करोगे उसने अपनी गाड़ी से कुछ पैसे निकाले और मुझे दिए। उसके बाद वह अक्सर मेरे घर के बाहर आ जाता और मुझे चोद कर जाता, मुझे वह कुछ पैसे दे देता। मुझे भी पैसे मिलने लगे थे तो मैंने भी कुछ समय बाद एक गाड़ी खरीद ली और अपने सपनों को मैं पूरा करने लगी।

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