Best Hindi sex stories

Sab se achi Indian Hindi sex kahaniya!

चुदाई की बेला में भैय्या भोसड़ी का


Click to Download this video!

desi sex stories दोस्तो, आज जो होना वाला है वह आपकी जिंदगी को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है | मैं आपको कुछ दस साल पहले हुई घटना के ऊपर कुछ सुनाने जा रहा हूँ | मैं रोजाना सुबह उठकर चाय पीता हूँ और नास्ता करता हूँ अब मैं एक शानदार हकीकत से आपको रुबरू करने वाला हूँ | जो मेरी पहले की जिन्दगी में हुआ वो बहुत शानदार था | जिन्दगी में अगर आपने चुदाई नहीं की तो कुछ नहीं किया | आज सारा कुछ छोड़कर अगर ये स्टोरी आपके सामने आ गयी है तो पढ़ लो वरना आप नपुंसक हो जाओगे | रोज तो यू ही रोजाना की जिन्दगी जी कर व्यतित करते ही हो | रोजाना बोर होने से बहतर है कुछ बोरियत दूर करने वाली वस्तु से मनोरजन किया जाये पर जब चुदाई हो तो बस वही हो | वैसे तो मनोरंजन पाने के लिए लोग बाहर घूमना पसंद करते है | लेकिन अगर आप के हाथ में फोन है और आप मनोरंजन के लिए तरस रहे हो तो सिर्फ इसे पढ़ लो | मैंने यह स्टोरी इसलिए दी है ताकि अपनी चुदाई की बढाई कर सकूँ |

मुझे कुछ दिन पहले चिकन गुनिया हो गया था और मैं बहुत तकलीफ में था | रोजाना मुझे दवा लेना पडता था | बीमार होने के हालत में मैंने वो कारनामा किया जिसे सुनकर सब आप लोग हक्का और बक्का दोनों रह जाओगे |  मैंने एक दिन में लड़की को पटाया और चोदा | दरसल वह लड़की पहेले से निर्वस्त्र थी | मैं एक कमरे में था और वह लड़की मेरे यहाँ आई हुई थी | उसने मुझे कमरे में लेटा हुआ नहीं पाया इसलिए मेरे कमरे में दरवाजा लगाकर नहाने के बाद सिर्फ तोलिया पहन कर आ गयी | अचानक मुझे कुछ आवाज आई जैसे बाहर से मुझे कोई बुला रहा हो | मैं कुर्सी पर बैठा हुआ था | मैं भागते हुए दरवाजे की तरफ मुड़ा तभी मुझे एक लड़की रागिनी नंगी नजर आई | वह मेरे सामने नंगी खड़ी थी और मैं भी उसके करीब था |

करीब होने की वजह से मैंने उसके दूध गलती से छू दिए | उसने रोका और कहा मैं कल आउंगी और मैंने उसे छोड़ दिया पर मुझे यकीन नही था ऐसा होगा | उसके लिए मैंने दरवाजा खोल दिया | दूसरे दिन जब दोपहर का वक्त था तो उसने मुझे खाना परोसा और मैं उसे देख रहा था और वो भी मुझे तिरछी निगाहों से देख रही थी | उस वक्त ऐसा महसूस हो रहा था जैसे प्यासे को पानी मिल गया हो | मैं खाना छोड़ कर उसकी तरफ मुड गया और यह सब होता रहा | दस साल पहले अपने माँ और पापा को छोडकर अपने दादा के घर पर रहता था | दादा की सेवा करता था और उनके लिए काम भी करता था | भोजन करते वक्त उसने मुझे पानी दिया तो पानी लेते वक्त मैंने उसके हाथो को छुआ और मुझे जोर से खासी आ गयी तो पूरा पानी गिर गया | वो दुसरे गिलास में पानी लाई और मुझे दिया | उससे मैंने रोटी मांगी वैसे मैं चावल आधिक खाता हूँ लेकिन बीमार होने की वजह से मैंने रोटी खाना शुरु किया था | मुझे रोटी खाने की सलाह डॉक्टर ने दी थी | मैं रोटी खा रहा था तभी दादा जी ने कहा तुमहारी तबियत कैसी है मैंने भी जवाब दिया पहेले से काफी आराम है | रागिनी भी उस वक्त उधर पर थी और मेरी सेवा कर रही थी | रागिनी हमारे यहाँ मेहमान के रूप में आई थी | लेकिन उसकी सेवा और काम के प्रति समर्पण ने मुझे आकर्षित किया था | वह रोजाना मेरे उठने से पहले दादा और दादी के लिए चाय और नास्ता बना देती थी | भोजन समाप्त करने के बाद जिस कमरे में दादा बैठे हुए थे दादा वहां से उठकर दुसरे कमरे में चले गये और कुछ पढने लगे | दादा सवास्थ से जुडी हुई जानकारी वाली किताब पड़ रहे थे | भोजन समाप्त करने के बाद मैं भी वहां से चला गया | मुझे प्यास लगने पर मैं किचन की तरफ गया और किचन में रागिनी भी पानी पी रही थी | मैंने भी पानी पिया | शाम के वक्त मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था तो वो मेरे लिए शरबत लायी | दरसल यह शरबत मेरे लिए बहुत गुणकारी था | इसलिए मैंने सरबत को ख़ास महत्व दिया था और तीनो वक्त सुबह, दोपहर और शाम को सरबत पीता था | मैं एक दिन फूलो का गजरा लाया और दादी और रागिनी को दिया | वह बहुत खुश हुई और दादी ने कहा तुम रोज फूलो का गजरा लाना और वह हस पड़ी और उसे देखकर सब हसने लगे |

वह हमारे यहा बहुत साल तक रही कुल मिलाकर वह हमारे यहाँ दस साल तक रही | हम भी उसकी परवाह करते थे और उसे कोई परेशानी न हो इसके लिए उसे सब कुछ देते थे | रागिनी एक तरह से हमारे दादा के घर की सदस्य थी और उसे ये स्थान देना भी बहुत अवश्यक था क्योकि वह बाहर से आई थी | वैसे वह भी शाहर की रहनी वाली थी और हम भी शहर में रहते थे | देहात के मुकाबले शहर में रहना फायदेमंद होता है | शहर की सुविधाए बहुत कारगर सिद्ध होती है और चिकन गुनिया होने की वजह से मैं दादा के यहाँ पर रुका हुआ था | वरना मैं बहुत पहले अपने माँ और पापा के यहाँ उतराखंड चला जाता | रागिनी को एक दिन मेरे पैर दबाना पड़े क्योकि मेरे दादा ने कहा था अगर तुम्हे आराम नहीं लग रहा है तो तुम्हारे पैर रागिनी से दबवा लो और रागिनी भी पैर दबाने के लिए तैयार हो गयी | मेरे लाख रोकने पर भी रागिनी ने मेरे पैर दबाना शुरु कर दिया | वह लगातार मेरे पैर दबा रही थी क्योकि वह काम को बहुत महत्व देती थी इसलिए वो मेरे पैर को दबा रही थी | दादा के अनुरोध करने पर वो रोजाना मेरी सेवा करने लगी |

उसने करीब दस महीने मेरे पैर दबाये ऐसा इसलिए हुआ क्योकि एक दिन पैर दबाते वक्त मैंने उसका हाथ पकड लिया था और उसके लबो को चूम लिया था | हम दोनो के बीच यह प्रक्रिया बहुत अन्ताराल तक चली | चूमते वक्त उसने मुझे कसकर पकड़ा हुआ था | फिर उसके बाद मैंने उस लडकी की चूत को सहलाने के लिए अपने हाथों की सहायता ली और उसकी चड्डी के अन्दर घुसेड दिए | कुछ समय के बाद मेरे लंड से माल गिरने लगा और लंड के उपर चिकनाई आने के वजह से उसकी चूत के अन्दर जाने लगा | खूब देर तक किये गए इस कृत्य की वजह से मुझे थकावट होने लगी और उसकी चुदाई की प्यास बढ़ने लगी | कुछ वक्त चूमने के बाद मैंने दरवाजा बंद कर दिया | लेकिन कोई के आने के भय से मैंने उसे सलाह दी जब कोई नहीं घर पर होगा तब हम ये सब करेंगें | वह भी ख़ुशी – ख़ुशी दूसरे कमरे में चली गयी | अगली सुबह हर दिन की तरह वह नास्ता ले कर मेरे कमरे में आई और हस्ते हुए हम दोनों ने नास्ता किया | नाश्ते में उसने आलू के पराठे और छोले की सब्जी दी थी |

उसकी सेवा और दवाई के कारण मैं कुछ तीन महीने में बीमारी से मुक्ति प्राप्त कर ली | रविवार के दिन छुट्टी रहती है और उस दिन सब घर से बहार रहते है क्योकि मौसी के यहाँ सब चले जाते है | तब मैं और वो रहते थे | यह मेरे लिए सुनहरा मैं का था | मैंने बाहर का गेट अंदर से बंद कर रागिनी को सबसे अंदर वाले कमरे की ओर बुलाया | वह आई और फिर मैंने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और उसे कुर्सी पर बैठने को कहा | वह बैठ गयी और मैं घुटने के बल बैठकर उसकी जांघो में हाथ फेरने लगा | मैंने उसके जांग को रगडा और उसको बाहों में उठाकर मेरे बिस्तर पर लेटा दिया | लेटाने के बाद मैं उसे चूमने लगा | मैंने उसके कपडे एक एक कर उतारना शुरू किया और वो मेरे उतारने लगी | मुझे रविवार का वक्त ही मिलता था उसे चोदने के लिए इसलिए मैं चोदने पर अधिक जोर देता और लम्बे समय तक उसे चोदता | पहले मैंने उसकी ब्रा को उतारा और उसके बाद उसको चूमने लगा और उसके बाद मैंने उसके दूध को पकड़ा और चूसने लगा | उसके निप्पल काफी कड़क हो गए थे और वो मदहोश होने लगी थी | उसके बाद मैंने उसकी चूत में एक उंगली की सहायता से चोदना चालु किया और वो आन्हे भरने लगी | उसके बाद उसने भी मेरे कपडे उतार दिए और मेरे खड़े हुए लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी जोर जोर से | मुझे भी मज़ा आने लगा और उसके बाद मैंने उससे कहा सुनो क्या तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले सकती हो ? उसने बिना कुछ कहे मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी | चूसते चूसते मेरे लंड से मुट्ठ की एक हलकी सी पिचकारी निकली जिससे उसका मुंह भर गया |

वो मेरे मुट्ठ को पी गयी और उसने मेरा लंड चूसना जारी रखा हुआ था | उसके बाद मैंने उसकी चूत को देखा तो उससे पानी निकल रहा था और मैंने तुरंत उसकी चूत पर मुंह लगाया और उसको चाटने लगा | वो मस्ती में सिस्कारियां भरने लगी | उसके बाद वो कहने लगी अब मेरी चुदाई कर दो मैं तरस रही हूँ और मैंने अपना सख्त लंड उसकी चूत में पेल दिया | उसकी चुदाई करने में मुझे बड़ा आनंद आ रहा था | उसकी मैं कभी घोड़ी बना रहा था तो कभी उसको बैठा के उसकी चूत मार रहा था | ऐसा काफी देर तक चला |

चुदते वक्त उसने मुझसे से कहा अब बस हो गया तो मैं बिस्तर से उठ गया | फिर बाहर कोई आया तो नहीं मालूम करने के लिए गेट की तरफ गया | वह मेरे बिस्तर पर बैठी हुई थी | मैंने उससे कुछ खाने के लिए लाने को कहा और वो नमकीन ले आई | रागिनी ने भी नमकीन खाया | मैं रागिनी को अक्सर रविवार के दिन चोदता था | भले मुझे चिकन गुनिया हुआ था लेकिन मुझे कोई आधिक फरक नहीं पड़ा और मैं चुदाई वाले कारनामे को भी आसानी से कर गया | दस साल तक मैंने रागिनी से बहुत लुफ्त उठाया | उसका महमान बनकर आना मेरे लिए बहुत हितकारी हुआ | रागिनी देखने में मोटी तगड़ी थी और कामकाजी थी | उसने मुझे आदर दिया जब तक वह दादा के यहाँ थी |

उसके सेवा सत्कार के कारण मैं कुछ दिनों में चिकन गुनिया से मुक्त हो गया | मुझे मालूम है आप लोग भी बीमार होने पर इस तरह का काम नहीं करते लेकिन महमान लड़की हो और आप जावन है तो ऐसा करना साधारण है | जवानी में मैंने बहुत लडकियां देखी है लेकिन उन्हें नहीं चोदा | रागिनी ही अकेली लड़की थी और है जिसे मैंने चोदा | मैं दरसल एक अनुभव पाने के लिए यह सब किया करता था | मेरे दादा नब्बे साल से ऊपर थे और इसलिए मुझे दादा के घर पर आकर उनकी सेवा करना पड़ती थी पर अब वो नही है |

Best Hindi sex stories © 2017
error:

Online porn video at mobile phone


hindi sex khanyahindi sax storaybhabhi suhagrat sexsexy story video hindiwww bhabhi chudai story commastram ki chudai ki hindi kahanibur ki chodai kahanichut aur land ki kahanidevar ne bhabhi ko chodasagi behan ki chudaireal sex in hindibur chudai ki kahani in hindigay sex story in hinglishchudai sex xxxbest indian sex storiesnew kamukta comdidi ki chudai hindi sex storybiwi ko chudwayabehan ko bus me chodasavita bhabi sexy storyhot hindi porn sexkuwari ladki ki chut ki chudaichudai ki kahani hindi mainaunty hindi kahanigoa mein chodahindi sax story in hindichudai ki hindi storychudai ki desi kahanibest hindi sex kahanibua ki ladki ki chudai hindiwww kamsutra sex comteacher ki chodai ki kahanisexy bahu ki chudaihinde sex store18 chutdoctarsex story with bhabhibest chudai ki kahani in hindiapni friend ko chodalund bur chuchilund ka topaadult sexy story hindilund chusahd desi chutchudai in khetpapa mummy ki chudai dekhihindi sex punjabimom xossipmaa ko jabardasti chodaghar me chudai kichachi hindi kahanidesi chut marisex story chudaiwww jija sali ki chudaimom xxx hindijija ne chodadesi incest sex story in hindisexy sakshireal kahani chudai kimaa ke sath chudai ki kahaniyahindi girl storydevar bhabhi sechudai kahani balatkarchudai ki rateinsexy bhabhi ki sexy chudaimami sex story in hindichut gandhot sexi storydesi gay sex storiessex chudai girlreal hindi kahanisex ki pyasiiss sexy storymaa sex comanter vasana story in hindichudai ki kahani in hindi freemedam ki chutpelne ki kahanibehan or bhai ki chudaikuwari chut ki imagesexy fucking kahaniwww hindi sex store comfull hindi sex storybahbi comgehri chutmaa ki chudai bete ke samnesex ki bhukhboor ki chudai storybadi chutmaa ko choda sex story in hindisuhagrat ko chudaigandi sexi storybhabhi ki gaand mari