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बॉयफ्रेंड ने मेरी सील तोड़ डाली


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मेरा नाम राधिका है मैं कॉलेज में पढ़ती हूं, मेरा यह कॉलेज का पहला वर्ष है। मैं जब कॉलेज में आई तो मुझे पहले बहुत ही अजीब लग रहा था क्योंकि हमारे स्कूल में सब लोग यूनिफॉर्म में आते थे और कॉलेज में किसी भी प्रकार की कोई यूनिफॉर्म नहीं थी। हमारे कॉलेज में सब लोग बड़े ही फैशनेबल है और इसीलिए हमारे कॉलेज में सब लोग बहुत बन ठन कर आते हैं। हमारे कॉलेज के लड़के भी बहुत परेशान करते हैं और सब लड़के लड़कियों पर ही चांस मारते हैं। मैं जब कॉलेज में गयी तो मुझ पर भी कुछ लड़के बहुत लाइन मार रहे थे लेकिन मैंने उनकी तरफ देखा भी नहीं क्योंकि मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई करना चाहती हूं,  इस वजह से मैंने उनके साथ ज्यादा बात नहीं की। वह लड़के मुझे अच्छे नहीं लगे। मैं अपनी क्लास में पढ़ने में भी अच्छी हूं और सब टीचर मेरी बहुत तारीफ करते हैं इसलिए मुझे लगता है कि मुझे अपनी पढ़ाई पर ही ध्यान देना चाहिए।

मेरे माता-पिता भी मेरी पढ़ाई को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं, वह हमेशा ही मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है, मेरे पिताजी स्कूल में क्लर्क हैं और मेरी माता घर का काम संभालती हैं इसीलिए मुझे कई बार ऐसा लगता है कि मुझे अपने जीवन में कुछ अच्छा करना चाहिए। उसके बाद मैं अपने घर वालों का सहारा बनना चाहती हूं। मेरा भाई अभी छोटा है और वह स्कूल में पढ़ रहा है, मेरे भाई की उम्र 15 वर्ष है। वह बहुत शरारती है उसके बावजूद भी मेरे माता-पिता उसे कभी कुछ नहीं कहते, मेरी मां उसको बहुत ही सपोर्ट करती है और कहती है कि अभी उसकी उम्र कम है इसलिए उसे अभी कुछ मत कहो। वह मुझे भी बहुत परेशान करता है और जब भी मैं घर पर होती हूं तो वह मुझे कुछ ज्यादा ही परेशान करता है, जिस वजह से मैं कई बार उस पर गुस्सा भी हो जाती हूं लेकिन उसके बाद मुझे लगता है कि मुझे अपने भाई पर गुस्सा नहीं होना चाहिए और मैं ही उससे बात कर लेती हूं।

मेरे पिताजी जब भी मेरे साथ अकेले में बैठे होते हैं तो वह मुझे हमेशा ही समझाते हैं वह कहते हैं कि तुम अपनी पढ़ाई अच्छे से करो ताकि तुम अपने जीवन में सफलता पा सको। मैं अपने पिताजी को हमेशा ही कहती हूं कि आप मुझ पर पूरा भरोसा रखिए मैं आपके भरोसे को बिल्कुल भी नहीं तोड़ूंगी। वह हमेशा ही मुझे याद दिलाते रहते हैं कि हम लोगों ने कितनी कठिनाइयों से निकल कर तुम्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाया है क्योंकि हमारे समाज में लड़कियों को बिल्कुल भी पढाया नहीं जाता, उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें पढ़ाने की सोची। मुझे सब लोग मना कर रहे थे उसके बावजूद भी मैंने तुम्हें कॉलेज में पढ़ाया। मैंने अपने पिताजी से कहा कि मुझे यह बात अच्छे से मालूम है कि आपको सब लोग इतना मना कर रहे थे, उसके बावजूद भी आपने मुझे कॉलेज में दाखिला दिलवाया और इसीलिए मैं आपकी हमेशा इज्जत करती हूं क्योंकि आपने मुझ में और मेरे भाई में कभी भी किसी प्रकार का अंतर नहीं किया,  आपने हम दोनों की जरूरतों को एक समान समझा और हमेशा ही आपने हम दोनों की जरूरतों को पूरा किया। मेरे पिताजी का नेचर जिस प्रकार का है वह बड़े ही अच्छे से और बड़ी शालीनता से समझाते हैं इसीलिए मुझे उनका नेचर बहुत अच्छा लगता है। मेरी मम्मी भी उनकी बहुत तारीफ करती हैं और कहती हैं कि तुम्हारे पिताजी का व्यवहार सब लोगों के साथ एक समान है इसीलिए सब लोग उनकी बड़ी इज्जत करते हैं और हमेशा ही उनसे सलाह मशवरा लेते हैं। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज से आती जाती रहती थी। हमारा कॉलेज बहुत बड़ा है इसलिए हमारे कॉलेज में काफी बच्चे हैं लेकिन मैं सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी इसलिए मुझे ज्यादा किसी के साथ बात करना अच्छा नहीं लगता था। हमारे क्लास के कुछ ही बच्चों से मैं बात करती थी क्योंकि बाकी बच्चे तो सिर्फ हमारे कॉलेज में घूमने के लिए आते थे, उन्हें पढ़ाई से कुछ भी लेना-देना नहीं था। एक दिन हम कॉलेज के ग्राउंड में बैठे हुए थे और मेरे पास की सीट में एक लड़का बैठा हुआ था। वह अकेले ही बैठा था, मुझे काफी अजीब लग रहा था जब वह अकेला बैठा हुआ था,  वह अपनी किताब खोल कर बैठा हुआ था। मुझे पहले लगा कि शायद वह किसी का इंतजार कर रहा है लेकिन वह बैठा हुआ था और अपनी किताब पढ़ने पर लगा हुआ था।

मैं काफी देर से उसे देख रही थी परंतु वह सिर्फ अपनी किताब में ध्यान से दे रहा था और मुझे भी काफी देर हो चुकी थी इसलिए मैंने सोचा कि मैं उस लड़के से बात करती हूं। मैं अब उस लड़के के पास चली गई और मैंने उससे पूछा कि क्या तुम यहां बैठकर किसी का इंतजार कर रहे हो, वह कहने लगा कि नहीं मैं किसी का भी इंतजार नहीं कर रहा हूं मैं पढ़ाई कर रहा हूं। मैंने उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया और कहा कि यह मेरा कॉलेज का पहला वर्ष है। उसने भी मुझे अपना इंट्रोडक्शन दिया और अपना नाम बताया, उसका नाम संतोष है, वह कहने लगा कि मैं बी कॉम का छात्र हूं और यह मेरा आखिरी वर्ष है। मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हें किताब पढ़ना अच्छा लगता है। वह कहने लगा हां मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है और मैं हमेशा ही कुछ ना कुछ नई चीजें पढ़ना चाहता हूं, जिससे कि मेरा ज्ञान बड़े। मैं संतोष के साथ काफी देर तक बैठी हुई थी और मैं जितनी देर भी उसके साथ बैठी हुई थी। मुझे उसके साथ बात करना अच्छा लग रहा था। मैंने संतोष को भी बताया कि मुझे भी किताब पढ़ने का बहुत शौक है और मैं भी खाली समय में किताब पढ़ लिया करती हूं। संतोष और मेरी पहली मुलाकात बहुत अच्छी रही और मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि मैं पहली बार संतोष से मिल रही हूं।

हम दोनों ही काफी अच्छे से बात कर रहे थे और काफी देर तक हम लोग साथ में बैठे रहे। मैंने संतोष से कहा कि अब मैं चलती हूं, फिर कभी तुमसे मिलूंगी। जब मैं जा रही थी तो संतोष ने मुझे आवाज लगाई और रोक लिया, उसने कहा कि क्या तुम मुझे अपना नंबर दे सकती हो, मैंने संतोष को आप अपना नंबर दे दिया उसके बाद मैं वहां से चली गई। मैं हमेशा की तरह ही कॉलेज जाती और उसके बाद अपने घर निकल जाती। कभी कबार संतोष मुझे मिल जाया करता था तो हम दोनों साथ में बैठकर समय बिता लेते। संतोष और मैं बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे लेकिन शायद यह दोस्ती अब किसी और तरफ मुड गई थी और मुझे संतोष से बात करना भी अच्छा लगने लगा था। वह भी मुझसे बात किए बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकता था इसीलिए वह मुझे हमेशा फोन कर दिया करता था। जब भी हम लोग साथ में होते तो कभी कबार हम लोग कॉलेज से घूमने के लिए भी चले जाते थे। एक दिन संतोष ने मुझे कहा कि हम लोग कहीं बाहर घूमने चलते हैं, मैंने उसे कहा कि मैं ज्यादा समय तक तुम्हारे साथ नहीं रुक पाऊंगी, वह कहने लगा कि हम लोगों को आने में देर हो जाएगी इसीलिए तुम अपने घर पर यह बात बता दो।  मैंने उस दिन अपने जीवन में पहली बार अपने घर वालों को झूठ बोला और कहा कि मैं आज अपनी सहेली के घर पर ही रुकने वाली हूं इसलिए मुझे आने में देर हो जाएगी और उस दिन मैं कॉलेज भी नहीं गई। संतोष और मैं उस दिन सुबह ही घूमने के लिए निकल पड़े। हम लोगों ने उस दिन एक साथ काफी समय बिताया।  मुझे संतोष के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा था और संतोष भी मेरे साथ समय बिता कर बहुत खुश था। वह कहने लगा कि हम लोग किसी होटल में चलते हैं मुझे पहले तो घबराहट हो रही थी लेकिन जब उसने मुझे कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं तो वह मुझे एक होटल में ले गया। जब हम दोनों उस होटल में गए तो मुझे थोड़ा डर लग रहा था लेकिन उसने रूम ले लिया। उसके बाद हम लोग होटल के कमरे में चले गए जब संतोष ने होटल में कमरा लिया तो हम दोनों अंदर चले गए और कुछ देर तक हम दोनों बैठे रहे।

अब हम दोनों ही एक साथ बैठे हुए थे कुछ समय बाद संतोष ने मुझे नंगा कर दिया और मेरी योनि को चाटने लगा। सतोष मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि को चाटने लगा मुझे बड़ा मजा आ रहा था जिस प्रकार से संतोष मेरी योनि को चाट रहा था। मैं उसे कहने लगी कि तुम बहुत ही अच्छी तरीके से मेरी योनि को चाट रहे हो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है काफी समय तक उसने ऐसा ही किया। मेरी योनि पूरी गीली हो चुकी थी तो उसने अपने लंड को धीरे धीरे मेरी योनि के अंदर डाल दिया और जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी योनि में घुसा तो मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा मैं चिल्लाने लगी लेकिन उसने भी मुझे कसकर पकड़ा हुआ था। वह मुझे बड़ी तीव्र गति से धक्के देने पर लग गया मैंने उसे कहा कि मुझसे तुम्हारे मोटे लंड को बिल्कुल भी नहीं झेला जा रहा है लेकिन वह ऐसे ही मुझे बड़ी तीव्र गति से झटके दे रहा था मेरी योनि से भी बहुत तेज खून निकल रहा था। उसने मेरे स्तनों को अपने मुंह में लिया और मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेते ही चूसने लगा वह बड़े अच्छे से मेरे स्तनों का रसपान कर रहा था मैं बहुत खुश थी। उसने मुझे 10 मिनट तक चोदा उसका वीर्य मेरी योनि के अंदर ही गिर गया। उसका वीर्य मेरी योनि में गिरा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और बहुत मजा आया। हम दोनो ने रात भर सेक्स किया और अगले दिन मेरी चूत में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। संतोष का भी लंड बुरी तरीके से छिल चुका था मैंने उसे कहा कि मुझे तो बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है मैं अच्छे से चल भी नहीं पा रही हूं। वह कहने लगा कोई बात नहीं यह दर्द ठीक हो जाएगा हम दोनों अपने घर चले गए। जब मैं अपने घर गई तो मैंने संतोष को फोन कर दिया उसके बाद संतोष और मैं फोन सेक्स करने लगे। जब भी वह मेरी चूत मारता है तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है।

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